दक्षिणी राज्यों के जलाशयों में पानी का भंडार अपेक्षाकृत कम
12-Sep-2025 05:59 PM
तिरुअनन्तपुरम। एक तरफ जहां पश्चिमोत्तर एवं मध्यवर्ती तथा पश्चिमी संभाग के बांधों- जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ा है वहीं दूसरी ओर दक्षिणी प्रायद्वीप में हाल के दिनों में कम वर्षा होने से पिछले सप्ताह के मुकाबले चालू सप्ताह के दौरान जल स्तर में कुछ कमी आई है।
केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू सप्ताह के दौरान दक्षिण भारत के 45 प्रमुख बांधों- जलाशयों में पानी का स्टॉक घटकर 46.30 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पर आ गया जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 54.939 बीसीएम का 84.27 प्रतिशत है।
पिछले सप्ताह यह जल स्तर 90 प्रतिशत से ऊपर चल रहा था। वैसे यह आंकड़ा संतोषजनक है और आगे इसमें सुधार आने के आसार हैं क्योंकि अगले महीने (अक्टूबर) से उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता बढ़ने वाली है जो सितम्बर तक जारी रहेगी। उत्तर-पूर्व मानसून से दक्षिण भारत में जाड़े के दिनों में अच्छी वर्षा होती है।
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष तेलंगाना के बांधों- जलाशयों में 91 प्रतिशत तथा कर्नाकट में 93 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है जबकि आंध्र प्रदेश में यह 89 प्रतिशत, तमिलनाडु में 71.87 प्रतिशत तथा केरल में मात्र 56 प्रतिशत है। दरअसल सुदूर दक्षिणी प्रान्त- केरल में पिछले कई दिनों से भारी वर्षा नहीं हुई है जिससे बांधों में जल स्तर घट गया है।
अन्य राज्यों में थोड़ी-बहुत बारिश होती रही है। इससे वहां खासकर धान की फसल को फायदा हो रहा है। तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ जिलो में बाढ़ भी आ गई थी।
दक्षिणी राज्यों में फिलहाल मसाला फसलों के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है जिसमें हल्दी एवं लालमिर्च से लेकर कालीमिर्च, छोटी इलायची, अदरक एवं जायफल-जावित्री तक शामिल है। लेकिन कुछ क्षेत्रों में बाढ़-वर्षा से दलहन-तिलहन एवं कपास की फसल प्रभावित हुई है।
