दलहन आयात के समझौते की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय
22-Dec-2025 09:20 PM
नई दिल्ली। वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने म्यांमार, मलावी तथा मोजाम्बिक के साथ दलहनों के शुल्क मुक्त आयत का जो पंचवर्षीय समझौता किया था उसकी समय सीमा अगले कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगी।
लेकिन सरकार ने इसकी अवधि को अगले पांच साल तक बढ़ाने का निर्णय लिया है और इन देशों के साथ मिल गए समझौते का जल्दी ही नवीनीकरण किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा संधि के तहत भारत में प्रति वर्ष मोजाम्बिक से 2 लाख टन, म्यांमार से 1 लाख टन तथा मलावी से 50 हजार टन अरहर (तुवर) का आयात किया जा।
उसके अलावा इस संधि में म्यांमार से 2.50 लाख टन उड़द के वार्षिक आयात का प्रावधान भी है। यह समझौता पांच साल पहले हुआ था और अब चालू वित्त वर्ष (2025-26) के समाप्त होने वाला है।
अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा उपरोक्त देशों के साथ किए गए आपसी सहमति के समझौते (एमओयू) की समयावधि के विस्तार का निर्णय लिया जा चुका है
लेकिन अउपसहरिक संधि की शुरुआत डिप्लोमैटिक चैनल्स के माध्यम से विदेश मंत्रालय द्वारा की जाएगी तीनों आपूर्तिकर्ता देश इस समझौते की अवधि बढ़ाने के लिए पहले से ही तैयार हैं और उसे भारत की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने का इंतजार है।
ध्यान देने वाली बात है कि भारत सरकार ने अफ्रीकी देश मोजाम्बिक के साथ वर्ष 2016 में 2 लाख टन सालाना तुवर के आयत का पंचवर्षीय समझौता उस समय किया था जब इस महत्वपूर्ण दलहन से निर्मित दाल का घरेलू बाजार भाव तेजी से उछलकर 200 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था।
उसके बाद सितम्बर 2021 में समझौते की समय सीमा को अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बाद भारत सरकार ने नवम्बर 2021 में मलावी से 50 हजार टन तथा म्यांमार से 1.00 लाख टन तुवर के सालाना आयात का पंचवर्षीय समझौता किया जिसकी समय सीमा मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक निर्धारित है।
हाल के वर्षों में भारत में दलहनों के आयात में भारी इजाफा हुआ 2024-25 में यह आयात 73 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
