दलहनों एवं खाद्य तेलों की वजह से कृषि उत्पादों का आयात खर्च 27 अरब डॉलर पर पहुंचा

22-Apr-2025 08:17 PM

मुम्बई। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत में कृषि उत्पादों के आयात पर 22.13 अरब डॉलर का खर्च बैठा था जो 2024-25 के वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में 20 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़कर 27 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

इसमें खासकर खाद्य तेलों, दलहनों एवं रूई के आयात का भारी योगदान रहा। इसके अलावा फलों और सब्जियों के आयात खर्च में भी बढ़ोत्तरी हुई। 

कृषि उत्पादों के आयात में लम्बे समय से वनस्पति तेल मात्रा और मूल्य की दृष्टि से शीर्ष स्तर पर बरकरार है। इसके बाद दलहनों, फसलों, सब्जियों एवं रूई आदि का स्थान आता है। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि खाद्य तेलों के आयात पर होने वाला खर्च वित्त वर्ष 2023-24 के 14.87 अरब डॉलर से 16.55 प्रतिशत उछलकर 2024-25 में 17.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों और खासकर पाम तेल की कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी के कारण आयात खर्च काफी बढ़ गया। 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि यद्यपि खाद्य तेलों का कुल आयात 155-160 लाख टन के बीच बरकरार रहा मगर पाम तेल की कीमत ऊंचे रहने से इसका कुल आयात खर्च काफी बढ़ गया। 2023-24 के वित्त वर्ष के दौरान भारत में 155.30 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ था।

पाम तेल का भाव ऊंचा रहने से 2024-25 में सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात बढ़ गया। चालू मार्केटिंग सीजन (2024-25) के शुरूआती पांच महीनों में यानी नवम्बर 2024 से मार्च 2025 के दौरान वनस्पति तेल का आयात 58 लाख टन दर्ज किया गया जो पिछले सीजन की समान अवधि के आयात 58.30 लाख टन से कुछ कम रहा। 

जहां तक दलहनों का सवाल है तो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इसका आयात खर्च तेजी से उछलकर 5.47 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो वित्त वर्ष 2023-24 के कुल आयात खर्च 3.74 अरब डॉलर से काफी ऊंचा रहा। सरकार द्वारा तुवर, उड़द, मसूर, पीली मटर तथा देसी चना के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने से खर्च में भारी बढ़ोत्तरी हो गई।