दलहनों के आयात खर्च में 35 प्रतिशत की कमी

17-Apr-2026 11:46 AM

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार भाव अपेक्षाकृत नरम रहने तथा कम मात्रा में माल मंगाए जाने से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दलहनों के आयात की मात्रा एवं इस पर खर्च होने वाली राशि में भारी गिरावट दर्ज की गई। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दलहनों के आयात पर होने वाला खर्च वित्त वर्ष 2024-25 के रिकॉर्ड स्तर 5.44 अरब डॉलर से 35 प्रतिशत घटकर वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) में 3.57 अरब डॉलर रह गया।

भारतीय मुद्रा में भी यह आयात खर्च समीक्षाधीन अवधि के दौरान 46.427 करोड़ रुपए से 31.52 प्रतिशत घटकर 31,793 करोड़ रुपए पर अटक गया। 

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक 2024-25 के वित्त वर्ष में देश के अंदर दलहनों का कुल आयात तेजी से उछलकर 73.20 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन 2025-26 के वित्त वर्ष में यह घटकर 56-57 लाख टन के करीब रह गया। 

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव के अनुसार पिछला बकाया स्टॉक मौजूद रहने तथा घरेलू उत्पादन लगभग सामान्य होने के कारण देश में दलहनों का कम आयात हुआ।

दूसरी ओर प्रमुख  आपूर्तिकर्ता देशों में विभिन्न दलहनों का भाव नीचे रहने से आयात खर्च काफी घट गया। 2024-25 की तुलना में 2025-26 के दौरान चना, पीली मटर, मसूर, तुवर एवं उड़द सहित अन्य प्रमुख दलहनों के वैश्विक बाजार मूल्य में औसतन 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद आयात में इजाफा नहीं हुआ। 

समीक्षाधीन अवधि के दौरान पीली मटर का भाव 380-400 डॉलर प्रति टन से घटकर 320-330 डॉलर प्रति टन रह गया।