दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
16-Jan-2025 05:58 PM
नई दिल्ली । हालांकि मानसून की अच्छी वर्षा होने तथा मौसम अनुकूल रहने से 2024-25 के सम्पूर्ण सीजन के दौरान देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है और कृषि तथा सम्बद्ध क्षेत्रों की विकास दर में भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है लेकिन दलहन-तिलहन फसलों के प्रति चिंता बरकरार रह सकती है।
यद्यपि केन्द्र सरकार ने खरीफ कालीन तिलहन फसलों के उत्पादन में इजाफा होने की संभावना व्यक्त की है लेकिन फिर भी यह क्रशिंग-प्रोसेसिंग उद्योग की मांग एवं जरूरत से पीछे रहने का अनुमान है। खाद्य तेलों का बेतहाशा आयात जारी है जिस पर विशाल धनराशि खर्च होती है।
खाद्य तेलों के भारी-भरकम आयात पर अंकुश लगाने के लिए तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर अपेक्षित स्तर तक पहुंचाना आवश्यक है लेकिन समस्या यह है कि कीमतों में नरमी का रुख बनने से किसान हतोत्साहित हो रहे हैं।
सोयाबीन एवं मूंगफली का थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है और इसलिए किसानों को औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
इस बार रबी सीजन में सरसों का बिजाई क्षेत्र भी करीब 5 लाख हेक्टेयर घट गया है जिससे उत्पादन में कमी आ सकती है।
सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पहले सरसों की भारी खरीद की गई और अब सोयाबीन तथा मूंगफली की खरीद की जा रही है।
जहां तक दलहनों का सवाल है तो खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर) एवं मूंग का उत्पादन तो बेहतर हुआ मगर उड़द की पैदावार घट गई।
विदेशों से उड़द एवं तुवर के साथ-साथ चना, मसूर एवं मटर का भारी आयात होने से घरेलू बाजार भाव नरम पड़ने लगा है।
मूंग का आयात बंद है। अगले महीने से रबी कालीन दलहन फसलों के नए माल की आवक शुरू होने वाली है जिससे कीमतों पर दबाव कुछ बढ़ सकता है।
सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से दलहनों की खरीद के लिए पहले से ही तैयार रहना चाहिए।
खाद्य तेलों की भांति देश में दलहनों का भी विशाल आयात हो रहा है जिसे नियंत्रित किए जाने की सख्त आवश्यकता है।
