दिसम्बर अल्पावधि के लिए ला नीना मौसम चक्र का आगमन संभव
09-Oct-2025 03:33 PM
तिरुअनन्तपुरम। ऑस्ट्रेलिया के मौसम पूर्वानुमान केन्द्र ने इस वर्ष दिसम्बर तक कुछ दिनों के लिए ला नीना मौसम चक्र के आगमन की संभावना व्यक्त की है जिससे देश के अनेक भागों में भारी वर्षा हो सकती है।
इससे रबी फसलों को कहीं फायदा और कहीं नुकसान हो सकता है। आमतौर पर दिसम्बर तक धान को छोड़कर अन्य खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी पूरी हो जाती है। अक्टूबर से दिसम्बर तक भारत में उत्तर-पूर्व मानसून सक्रिय रहता है जिससे दक्षिण भारत में काफी वर्षा होती है।
ध्यान देने की बात है कि ला नीना मौसम चक्र के दौरान एशिया और खासकर भारत में जोरदार बारिश होने तथा कहीं-कहीं बाढ़ आने की संभावना रहती है।
ऑस्ट्रेलियाई मौसम एजेंसी के मुताबिक इस वर्ष दिसम्बर के प्रथम पखवाड़े में ला नीना मौसम चक्र का आगमन होने की उम्मीद है जो फरवरी 2026 के अंत तक सक्रिय रह सकता है।
मौसम ब्यूरो का मॉडल फिलहाल यह संकेत दे रहा है कि ट्रॉपिकल प्रशांत महासगार में परिस्थितियां ला नीना की उत्पत्ति के लिए अनुकूल हो गई हैं।
23 सितम्बर से 23 दिसम्बर 2025 के दौरान इसका निर्माण कभी भी हो सकता है। इसकी सक्रियता दिसम्बर 2025 से फरवरी 2026 तक बढ़ेगी और उसके बाद उदासीन या न्यूट्रल हो जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय मॉडल से संकेत मिलता है कि प्रशांत महासागर कुछ और समय तक ठंडा रह सकता है जिससे ला नीना की सक्रियता बसंतकाल तक बढ़ सकती है लेकिन उस समय तीव्रता कम रहेगी और इसकी वापसी आरंभ हो जाएगी।
सितम्बर 2025 के दौरान एशिया तथा यूरोप में अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई और भारत समेत अनेक देशों में भीषण बाढ़ का प्रकोप देखा गया। इससे कृषि फसलों को हानि हुई।
भारत में अब रबी फसलों की बिजाई का समय शुरू हो गया है और खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है। यदि ला नीना की वर्षा हुई तो बिजाई में कहीं-कहीं बाधा पड़ सकती है।
