देश के उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्र में पानी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद

12-Sep-2025 08:35 PM

नई दिल्ली। अगस्त माह के दूसरे पखवाड़े से लेकर सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक देश के उत्तरी एवं पश्चिमी राज्यों में नियमित रूप से हुई जोरदार मानसूनी बारिश के कारण न केवल खेतों में पानी भर गया और कुछ क्षेत्रों में भीषण बाढ़ आ गई बल्कि बांधों जलाशयों में जल स्तर भी काफी बढ़ गया।

जून के मध्य में पंजाब, राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के जो जलाशय सूखने के कगार पर पहुंच गए थे उसमें अब 85-95 प्रतिशत भंडारण क्षमता तक पानी का स्टॉक जमा हो गया है। इसी तरह महाराष्ट्र, गुजरात एवं गोवा के बांध पानी से भरे हुए हैं। 

केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के उत्तरी संभाग में 11 प्रमुख बांधों में फिलहाल 18.243 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएएम) पानी का सटोक मौजूद है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 19.836 बीसीएम का 92 प्रतिशत है।

पंजाब के जलाशयों में भंडारण क्षमता के मुकाबले 88.65 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश के सरोवरों में 91 प्रतिशत और राजस्थान के बांधों में 95.5 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है। ये तीनों राज्य बाढ़ की चपेट में भी है। 

उधर पश्चिमी क्षेत्र के 50 प्रमुख जलाशयों / बांधों में पानी की कुल भंडारण क्षमता 37.357 बीसीएम की है जबकि उसमें 34.147 बीसीएम या 91.5  प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है।

इसके तहत कुछ भंडारण क्षमता के सापेक्ष गुजरात के बांधों में 85.66 प्रतिशत तथा महाराष्ट्र के जलाशयों में 96.83 प्रतिशत पानी का स्टॉक उपलब्ध है।

गोवा का एकमात्र जलाशय पानी से पूरी तरह भरा हुआ है। गुजरात एवं महाराष्ट्र के कुछ जिलों की इस वर्ष बाढ़ की गंभीर विभीषिका का सामना करना पड़ रहा है और वहां मानसून अब भी सक्रिय बना हुआ है। 

जिन इलाकों में सामान्य या थोड़ी-बहुत अधिशेष बारिश हुई  खरीफ फसलों की हालत बहुत अच्छी बताई जा रही है। महाराष्ट्र के अधिकांश जिलों में बाढ़ का संकट लगभग खत्म हो गया है

मगर गुजरात के कुछ जिलों में चिंता अभी बरकरार है। यदि चालू माह के दौरान आगे इन दोनों प्रांतों में लगातार मूसलाधार बारिश नहीं हुई तो हालात संभल सकते हैं।