धान और गेहूं के सीमित उत्पादकों को मिलता है एमएसपी का लाभ
05-Mar-2025 07:33 PM
नई दिल्ली। एक सरकारी संस्थान द्वारा तैयार की गई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में धान और गेहूं के उत्पादकों की सीमित संख्या को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली का लाभ हासिल हो रहा है जबकि अधिकांश किसान इससे वंचित रह जाते हैं।
अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार केवल 15 प्रतिशत धान उत्पादकों एवं 9.6 प्रतिशत गेहूं उत्पादकों को ही एमएसपी का लाभ मिल पाता है। उल्लेखनीय है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी सहित कुछ अन्य मांगों के साथ किसानों का एक वर्ग लगातार आंदोलन कर रहा है और केन्द्र सरकार के साथ उसकी कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है।
वार्ता का यह दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है। हालांकि एमएसपी की वजह से किसानों को अपने उत्पाद का लाभप्रद मूल्य प्राप्त होता है और फसलों की उपज दर में सुधार आने की उम्मीद भी रहती है लेकिन इससे लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या कुल उत्पादकों के सापेक्ष बहुत कम है।
इसके अलावा धान के उत्पादक किसान अपने कुल विपणन योग्य स्टॉक के लगभग 24 प्रतिशत भाग की बिक्री इस बेंचमार्क कीमत यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने में सक्षम हो पाते हैं जबकि गेहूं के किसान केवल 21 प्रतिशत स्टॉक ही एमएसपी पर बेचने में सफल हो रहे है।
चिंता की बात यह भी है कि धान तथा गेहूं की खरीद के लिए सरकारी एजेंसियों का ध्यान केवल प्रमुख उत्पादक राज्यों पर केन्द्रित होता है इसलिए छोटे-छोटे उत्पादक राज्यों के किसानों की उपेक्षा हो जाती है।
उदाहरणस्वरूप, गेहूं की खरीद केन्द्रीय पूल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान और कुछ हद तक बिहार में की जाती है जबकि अन्य उत्पादक राज्यों में सरकारी एजेंसियों की सक्रियता बहुत कम देखी जाती है।
इसी तरह धान की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार एवं तमिलनाडु में सर्वाधिक होती है मगर पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित अन्य उत्पादक प्रांतों के किसानों को एमएसपी का समुचित फायदा हासिल नहीं हो पाता है।
