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13-Oct-2026 11:05 AM
मुम्बई। 31 अक्टूबर को रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा समाप्त हो रही है जबकि कुछ इलाकों में कपास का रकबा घटने तथा वर्षा का अभाव रहने से उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। इसे देखते हुए उद्योग-व्यापार क्षेत्र द्वारा रूई की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखाई जा रही है रूई का घरेलू एवं वैश्विक बाजार भाव ऊंचा उठने लगा है।
प्रमुख थोक मंडियों में रूई के नए माल की आवक कम होने तथा आपूर्ति की गति धीमी रहने से पिछले सप्ताह कीमत 3000-4000 रुपए उछलकर 68,000 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) की ऊंचाई पर पहुंच गई। महराष्ट्र में न केवल कपास के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है बल्कि भयंकर सूखे से फसल की प्रगति भी प्रभावित हो रही है।
उत्पादन घटने की आशंका तथा आगामी समय में कीमत तेज होने की उम्मीद से बड़े-बड़े उत्पादकों ने रूई का स्टॉक पकड़ना शुरू कर दिया है जिससे मंडियों में समुचित मात्रा में इसकी आवक नहीं हो रही है।
गत सप्ताह न्यूयार्क स्थित इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में भी दिसम्बर 2026 एवं मार्च 2027 के अनुबंध हेतु रूई के वायदा मूल्य में सुधार दर्ज किया गया। इसी तरह सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने 2025-26 सीजन में खरीदी गई रूई के नीलामी मूल्य में सभी राज्यों के लिए 500 रुपए प्रति कैंडी का इजाफा कर दिया।
मौजूदा मार्केटिंग सीजन के शुरुआती 9 नौ दिनों में यानी 1 से 9 अक्टूबर के दौरान देश भर की मंडियों में कुल मिलाकर लगभग 5 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई की आवक हुई। 12 अक्टूबर को लगभग 78 हजार गांठ रूई की आपूर्ति हुई और इसकी लगभग पूरी मात्रा की खरीद हो गई।