उत्तरी गुजरात में भारी वर्षा से दलहन फसलों को नुकसान
12-Sep-2025 04:35 PM
पाटन। गुजरात कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि राज्य के उत्तरी भाग में चालू माह के दौरान अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने तथा खेतों में पानी भर जाने से खरीफ कालीन दलहन फसलों- अरहर (तुवर), मूंग एवं उड़द की फसल बुरी तरह प्रभावित प्रभावित हो रही है
और खासकर कच्छ (भुज) तथा पाटन जिलों में इसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। वैसे सरकार द्वारा अभी तक फसल को हुई क्षति के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है क्योंकि राज्य के विभिन्न भागों में बारिश का दौर अभी जारी है जिससे आगे फसल को और नुकसान हो सकता है।
उधर तेलंगाना में खरीफ कालीन दलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 2.34 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 3.20 लाख हेक्टेयर से काफी कम रहा।
अरहर (तुवर) का सामान्य औसत क्षेत्रफल 2.71 लाख हेक्टेयर आंका गया जबकि वास्तविक रकबा 1.99 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका। इसी तरह पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के मुकाबले मूंग का उत्पादन क्षेत्र 35 हजार हेक्टेयर से घटकर 24 हजार हेक्टेयर और उड़द का बिजाई क्षेत्र 13,325 हेक्टेयर से गिरकर 10,125 हेक्टेयर पर अटक गया।
खरीफ कालीन दलहन फसलों की जोरदार कटाई-तैयारी अगले महीने (अक्टूबर) से आरंभ होने वाली है और इसकी कीमतों के बारे में उत्पादक अभी से चिंतित होने लगे हैं। कुछ क्षेत्रों में अगैती नई फसल की कटाई शुरू हो चुकी है और फिलहाल इसमें नमी का अंश कुछ ज्यादा देखा जा रहा है।
उधर अंतर्राष्ट्रीय दलहन बाजार नरमी की चपेट में फंसा हुआ है और आगे का परिदृश्य भी उत्पादकों के लिहाज से ज्यादा खुशनुमा नजर नहीं आता है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस एवं अफ्रीका में विभिन्न दलहनों का बेहतर उत्पादन होने के संकेत मिल रहे हैं।
भारत में बाढ़-वर्षा से फसल को हुई क्षति के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दलहनों का भाव नरम बना हुआ है जबकि भारत इसका सबसे प्रमुख खरीदार देश है। कनाडा, रूस एवं अफ्रीका में दलहनों के नए माल की आवक पहले ही शुरू हो चुकी है।
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन बढ़ने की संभावना से मसूर के वैश्विक बाजार मूल्य पर दबाव बना हुआ है। कनाडा में 24.50 लाख टन एवं ऑस्ट्रेलिया में 17.10 लाख टन मसूर के उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। रूस में भी इसका उत्पादन बढ़ने के आसार हैं।
