उत्तरी राज्यों में बाढ़ वर्षा एवं ब्राजील से सस्ते आयात के कारण कालीमिर्च का भाव नरम
16-Sep-2025 08:04 PM
नई दिल्ली। यद्यपि कालीमिर्च का उत्पादन कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में होता है मगर अधिकांश उपयोग उत्तरी भारत में किया जाता है।
उत्तरी भारत में बाढ़- वर्षा का भयंकर प्रकोप रहने से न केवल कालीमिर्च का कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि पीक त्यौहारी सीजन में इसकी मांग एवं खपत में वृद्धि भी अनिश्चित हो गई है। उत्तरी क्षेत्र के खपत केन्द्रों में मांग सुस्त रहने से कालीमिर्च की कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार पिछले एक सप्ताह के दौरान कोच्चि के टर्मिनल मार्केट में कालीमिर्च का भाव 15 रुपए प्रति किलो घटकर अब गार्बल्ड श्रेणी के लिए 706 रुपए प्रति किलो तथा अनगार्बल्ड किस्म के लिए 686 रुपए प्रति किलो पर आ गया है।
इसके साथ-साथ ब्राजील से उच्च घनत्व वाली बल्क एवं कोल्ड दाने की सस्ती कालीमिर्च का भारी आयात होने से दिसावरी बाजारों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई है जिससे स्वदेशी कालीमिर्च की मांग प्रभावित हो रही है।
भारतीय कालीमिर्च एवं मसाला व्यापार संघ (इप्सता) के डायरेक्टर का कहना है कि उत्तरी भारत के अधिकांश खपतकर्ता बाजारों में कालीमिर्च का कारोबार सुस्त पड़ गया है। इसके अलावा बिहार तथा झारखंड में आगामी समय में होने वाले विधानसभा का चुनाव भी व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
नवरात्रि तो 22 सितम्बर से आरंभ हो रही है और 2 अक्टूबर को दहशरा (दुर्गा पूजा) का त्यौहार मनाया जाएगा। यदि वर्षा का दौर जारी रहा तो कालीमिर्च का कारोबार और भी सुस्त पड़ सकता है।
महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में मानसूनी वर्षा का दौर अभी बरकरार है। मौसम साफ होने पर ही कारोबार सुधर सकता है।
प्रमुख उत्पादक देशों में कालीमिर्च का स्टॉक कम बचा है क्योंकि अमरीकी टैरिफ के कारण कालीमिर्च के अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य में गिरावट आ गई है।
कालीमिर्च का भाव ब्राजील में 6400 डॉलर, वियतनाम में 6700 डॉलर, इंडोनेशिया तथा श्रीलंका में 7400-7400 डॉलर तथा भारत में 8100 डॉलर प्रति टन चल रहा है। अमरीकी खरीदार शिपमेंट को स्थगित रखने पर जोर दे रहे हैं।
