उत्तरी राज्यों में बारिश की कमी से रबी फसलों का विकास प्रभावित होने की आशंका
20-Dec-2024 08:05 PM
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्तर पर यद्यपि रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से कुछ आगे निकल गया है मगर इसमें मुख्यत: तीन जिंसों- गेहूं, धान एवं चना का विशेष योगदान है जिसका रकबा बढ़ा है। शेष सभी फसलों का क्षेत्रफल या तो पिछले साल के बराबर या पीछे चल रहा है।
रबी फसलों की बिजाई अगले कुछ सप्ताहों तक जारी रहेगी लेकिन उत्तरी भारत में लम्बे समय से अच्छी वर्षा नहीं होने से फसलों की प्रगति में बाधा पड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है।
दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा केरल जैसे राज्यों के कई भागों में बारिश होती रही है जिससे वहां रबी फसलों को कहीं-कहीं नुकसान होने खबर भी आ रही है।
दूसरी ओर मौसम विभाग ने उत्तरी, मध्यवर्ती एवं पश्चिमोतर राज्यों में तापमान सामान्य औसत से ऊंचा रहने और कुछ समय तक धुंध तथा घने कोहरे का प्रकोप होने का अनुमान लगाया है।
यह सही है कि राष्ट्रीय स्तर पर 155 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल और 10 वर्षीय औसत से ऊंचा है लेकिन यह कुछ भागों में ज्यादा ऊंचा और अन्य क्षेत्रों में कम ऊंचा है। इसके अलावा जिन इलाकों में सिंचाई की पक्की व्यवस्था नहीं है अथवा जो क्षेत्र वर्षा पर ही आश्रित है वहां लम्बे समय तक बारिस नहीं होने पर फसलों का विकास बाधित हो सकता है।
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कई इलाकों में बारिश की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।
हालांकि तापमान में गिरवट आने लगी है जिससे खेतों की मिटटी में नमी सूखने की गति धीमी पड़ जाएगी मगर आगे फसलों के स्वस्थ एवं नियमित विकास के लिए वर्षा की जरूरत पड़ेगी। शीतकाल की एक-दो बारिश रबी फसलों के लिए वरदान साबित होती है।
कई राज्यों में इस बार गेहूं की बिजाई को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि इसका बाजार भाव काफी ऊंचा चल रहा है और सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी 2275 रुपए से बढ़ाकर 2425 रुपए प्रति क्विंटल नियत कर दिया है।
