ऊंचे बाजार भाव के कारण अरंडी के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि के आसार

05-Aug-2025 01:19 PM

राजकोट। अत्यन्त ऊंचे बाजार भाव के कारण हुई आकर्षक आमदनी से उत्पादित किसान इस बार अरंडी का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।

गुजरात और राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में जीरा तथा धनिया के कुछ परम्परागत उत्पादक इलाकों में इस बार अरंडी की खेती को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। जीरा और धनिया रबी कालीन मसाला फसल है जिसकी बिजाई अक्टूबर-नवम्बर में होती है। 

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार पिछले साल जिन किसानों ने जीरा एवं धनिया की खेती की थी वे इस बार अरंडी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि इस महत्वपूर्ण औद्योगिक तिलहन फसल का बाजार भाव उछलकर अत्यन्त ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त-गुजरात में अरंडी की बिजाई जोर शोर से जारी है और पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में वहां इसके उत्पादन क्षेत्र में 15-17 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि हो सकती है। पिछले कुछ महीनों से अरंडी का थोक मंडी भाव तेज चल रहा है और अब रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले इस बार अरंडी का उत्पादन क्षेत्र 4 अगस्त तक गुजरात में 1,46,679 हेक्टेयर से 83,323 हेक्टेयर बढ़कर 2,30,002 हेक्टेयर पर तथा राजस्थान में 52,030 हेक्टेयर से 10,757 हेक्टेयर सुधरकर 62,787 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।

अरंडी का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल इस बार 9.70 लाख हेक्टेयर आंका गया है। अरंडी की बिजाई का खर्च अपेक्षाकृत     कम बैठता है जबकि इसकी औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है। 

कृषि मंत्रालय के एक निकाय- एगमार्क नेट के अनुसार पिछले साल की तुलना में अरंडी का भाव इस बार कम से कम 500 रुपए बढ़कर 6500 रुपए प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गया है जबकि जीरा का दाम 25000 रुपए से घटकर 15,000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है।

मंत्रालय के मुताबिक अरंडी का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 19.59 लाख टन से घटकर 2024-25 में 17.30 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि अरंडी का बाजार अब अगले दो महीनों तक मजबूत रह सकता है क्योंकि इसका स्टॉक तेजी से घट रहा है।