ऊंचे तापमान एवं डीएपी के अभाव से प्रमुख रबी फसलों की बिजाई की गति धीमी

02-Dec-2024 06:47 PM

नई दिल्ली । अक्टूबर माह के ऊंचे तापमान तथा डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद नीलामी के कारण गेहूं, सरसों, चना तथा अन्य प्रमुख  रबी फसलों की बिजाई की गति धीमी पड़ गई और इसका रकबा सात वर्ष से पीछे हो गया।

हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश के कारण बांधों-जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और अनेक इलाकों में खेतों में नमी भी उपलब्ध है जिससे बिजाई की गति में कुछ सुधार आने की उम्मीद है लेकिन इसके लिए डीएपी की कमी को दूर करना जरुरी होगा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक पिछले साल की तुलना में इस वर्ष गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 48.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 41.30 लाख हेक्टेयर, सरसों का बिजाई क्षेत्र 50.73 लाख हेक्टेयर से गिरकर 49.90 लाख हेक्टेयर तथा चना का क्षेत्रफल 27.42 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 24.57 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया।

ध्यान देने की बात है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा 8 नवम्बर के बाद से रबी फसलों की बिजाई का आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। 

रबी सीजन के दौरान उपरोक्त फसलों के अलावा मसूर, मटर, जौ, मक्का, मूंगफली, अलसी, तथा मूंग-उड़द की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है जबकि मसाला   फसलों में जीरा, धनिया, लहसुन एवं सौंफ आदि का उत्पादन होता है।

इस वर्ष अक्टूबर माह के दौरान सामान्य स्तर के मुकाबले औसत उच्चतम तापमान 0.68 डिग्री, न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री तथा मध्यमान तापमान 1.23 डिग्री सेल्सियस ऊंचा रहा। अक्टूबर में औसत न्यूनतम तापमान देश के पश्चिमोत्तर, मध्यवर्ती एवं दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में वर्ष 1901 के बाद सबसे ऊंचा रहा।

इससे खासकर जीरा एवं अन्य सीड मसालों की बिजाई में देर हो गई। जहां कहीं बिजाई पहले हुई वहां कई इलाकों में बीज में अंकुरण कम देखा गया। 

सरसों की बिजाई भी कुछ देर से आरंभ हुई और इसकी फसल में भी अंकुरण की स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है। ऊंचे तापमान के कारण कहीं-कहीं सरसों की फसल पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप भी देखा जा रहा है। रबी फसलों की बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।