ऊंचे तापमान से यूपी में गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका
08-Feb-2025 04:20 PM
लखनऊ । पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के कई भागों में दिन के तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हो रही है जिससे राज्य में गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश भारत में गेहूं का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार ऊंचे तापमान का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश में गेहूं की फसल पर पड़ने लगा है।
वहां इसके पौधे का आकार 70-80 से०मी० के सामान्य स्तर की तुलना में लगभग आधा ही पहुंच रहा है। छोटे आकार के पौधे में दाने कम लगेंगे और समय से पूर्व ही उसके पकने की आशंका भी रहेगी।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक का कहना है कि राज्य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं न्यूनतम तापमान भी 15 डिग्री सेल्सियस के बेंचमार्क स्तर से ऊपर पहुंच गया है जिससे गेहूं की फसल को खतरा हो सकता है। यदि यह स्थिति बरकरार रही तो फसल का विकास बाधित हो जाएगा।
महानिदेशक के अनुसार अगले कम से कम 10-15 दिनों तक न्यूनतम तापमान 15 डिग्री से नीचे रहना अत्यन्त आवश्यक है तभी फसल को रिकवरी का अवसर मिल सकेगा।
अन्यथा गेहूं के उत्पादन में काफी गिरावट आ सकती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचे तापमान एवं बारिश के अभाव के कारण खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में गेहूं की उपज दर में 2-3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की गिरावट आ सकती है।
लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालत अभी चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंची है क्योंकि वहां तापमान अपेक्षाकृत नीचे तथा सामान्य स्तर के आसपास ही बना हुआ है।
फरवरी का ऊंचा तापमान गेहूं की फसल के लिए अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि खेतों की मिटटी में नमी का अभाव होने से फसल की प्रगति में बाधा पड़ती हैं।
उसमें फूल और दाने कम लगते हैं तथा दानों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बेंचमार्क स्तर की तुलना में थोड़ा ऊंचा तापमान भी गेहूं की उपज दर में गिरावट का कारण बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में गेहूं की बोआई तो अच्छी हुई है मगर वर्षा पर आश्रित इलाकों में फसल को खतरा होने की आशंका है।
