ऊंचे दाम पर सीमित मांग से चीनी बाजार में स्थिरता

11-Sep-2025 01:48 PM

मुम्बई। उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र के प्रमुख थोक बाजार में चीनी का एक्स फैक्टरी मूल्य 10 सितम्बर को भी लगभग स्थिर बना रहा। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार ऊंचे दाम पर मांग कमजोर पड़ने से चीनी की कीमतों में पिछले दो-तीन दिनों में स्थिरता  का माहौल बना हुआ है। सितम्बर माह के लिए सरकार ने 23.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा जारी किया है और मिलर्स इसकी बिक्री बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश में चीनी का एक्स-फैक्टरी मूल्य चालू सप्ताह के पहले दिन 8 सितम्बर को 50-60 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा था मगर 9 एवं 10 सितम्बर को यह स्थिर हो गया। कीमतों में आई तेजी के कारण चीनी की मांग कमजोर पड़ गई और इसकी लिवाली में खरीदारों की दिलचस्पी घट गई। रिसेल मार्केट में चीनी की कीमतों में 5-10 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी आ गई। ऊंचे भाव पर इसकी खरीद कम हुई।

उल्लेखनीय है कि सितम्बर माह के लिए 23.50 लाख टन का फ्री सेल कोटा जारी होने के बाद चीनी के दाम में 40-50 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी आ गई थी।

दरअसल उद्योग-व्यापार क्षेत्र ने सितम्बर 2025 के लिए 22-23 लाख टन चीनी का कोटा निर्धारित होने का अनुमान लगाया था लेकिन वास्तविक कोटा इससे अधिक छोड़ा गया जिससे कीमतों पर दबाव पड़ गया। धीरे-धीरे चीनी का बाजार अब सामान्य स्तर की ओर लौट रहा है। अगस्त माह के लिए 22.50 लाख टन एवं सितम्बर 2024 के लिए 23.50 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा नियत किया गया था। 

नई लिवाली का अभाव होने के कारण महाराष्ट्र में चीनी का भाव स्थिर बना रहा। बम्बई शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अनुसार महाराष्ट्र में 25 सितम्बर के आसपास चीनी में मांग तेज होने की उम्मीद है जबकि इस बार गन्ना की क्रशिंग भी जल्दी शुरू हो सकती है। 

10 सितम्बर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी का भाव 3900/4020 रुपए प्रति क्विंटल के बीच स्थिर बना रहा और राज्य के मध्यवर्ती भाग में भी इसी मूल्य स्तर पर कोई उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।

उधर महाराष्ट्र के मुम्बई मार्केट में चीनी के दाम में   4082/4162 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिरता देखी गई और कोल्हापुर में भी इसका भाव 3910/3980 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर बरकरार रहा। 

इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज में कच्ची चीनी (रॉ शुगर) का वायदा भाव 15.83 सेंट प्रति पौंड पर स्थिर बना हुआ था क्योंकि ब्राजील में उत्पादन की स्थिति बेहतर हो गई है।