वर्षा की कमी से खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से पीछे
16-Jun-2026 01:48 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के लेट से आने तथा आगे बढ़ने की गति धीमी रहने से देश के अधिकांश भागों में 15 जून तक वर्षा का भारी अभाव देखा जिससे खरीफ फसलों की बिजाई पर असर पड़ा। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 12 जून तक राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 84.60 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 88.04 लाख हेक्टेयर से 3.44 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून की रफ्तार अब भी धीमी देखी जा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र तो 3.88 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.98 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 2.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.55 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
इसी तरह मोटे अनाजों का रकबा 4.32 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 4.77 लाख हेक्टेयर हो गया मगर तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 3.54 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 3.51 लाख हेक्टेयर रह गया। कपास का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 13.19 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर इस बार 9.53 लाख हेक्टेयर तथा गन्ना का रकबा 54.29 लाख हेक्टेयर से गिरकर 54.08 लाख हेक्टेयर रह गया।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है जबकि मोटे अनाजों में ज्वार एवं मक्का का क्षेत्रफल पीछे है। तिलहन फसलों में मूंगफली का रकबा तो 2.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.57 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया मगर सोयाबीन, तिल एवं सूरजमुखी का क्षेत्रफल पीछे हो गया।
मक्का का उत्पादन क्षेत्र 2.59 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.28 लाख हेक्टेयर तथा ज्वार का बिजाई क्षेत्र 80 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 73 हजार हेक्टेयर रह गया। दलहन फसलों में मूंग की बिजाई गत वर्ष से 85 हजार हेक्टेयर पीछे चल रही है।
खरीफ फसलों की खेती का अभी आरंभिक दौर है और वर्षा के अभाव तथा ऊंचे तापमान से किसानों को विभिन्न फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में कठिनाई हो रही है। सबका ध्यान मानसून पर केन्द्रित है।
