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24-Sep-2026 12:08 PM
मुम्बई। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का भारी अभाव होने से चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र में न केवल खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में जबरदस्त गिरावट आ गई है बल्कि कई क्षेत्रों में नमी की कमी के कारण फसलें सूखने भी लगी है। इससे उपज दर एवं क्वालिटी प्रभावित होगी।
राज्य कृषि विभाग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान 21 सितम्बर तक महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का एक उत्पादन क्षेत्र 145.86 लाख हेक्टेयर के 7.13 लाख हेक्टेयर घटकर 138.73 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके तहत धान एवं मोटे अनाजों का संयुक्त उत्पादन क्षेत्र 35.13 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 31.36 लाख हेक्टेयर,
दलहनों का बिजाई क्षेत्र 18.78 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.18 लाख हेक्टेयर तथा गन्ना का क्षेत्रफल 2.71 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.46 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जबकि तिलहन का रकबा 51.01 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 51.33 लाख हेक्टेयर तथा कपास का बिजाई क्षेत्र 38.23 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 38.41 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान महाराष्ट्र में धान का उत्पादन क्षेत्र 15.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 14.00 लाख हेक्टेयर ज्वार का रकबा 73 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 65 हजार हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 3.25 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.81 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 14.53 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.02 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 12.21 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 12.02 लाख हेक्टेयर, मूंग का बिजाई क्षेत्र 2.11 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.48 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 3.78 लाख हेक्टेयर से घटकर करीब 2 लाख हेक्टेयर रह गया। अन्य दलहनों का रकबा गत वर्ष के बराबर ही रहा।
तिलहन फसलों में सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 49.48 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 49.71 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 1.37 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.41 लाख हेक्टेयर हो गया। सूरजमुखी का रकबा 10 हजार हेक्टेयर रहा।