वैश्विक बाजार में ऑस्ट्रेलियाई दलहन निर्यातकों की बढ़ सकती है कठिनाई

07-May-2025 03:34 PM

ब्रिसबेन। ऑस्ट्रेलिया से चना, मसूर, फाबा बीन्स, ल्यूपिन एवं मटर जैसे दलहनों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है लेकिन वैश्विक स्तर पर मांग एवं आपूर्ति के बदलते समीकरण को देखते हुए निर्यातकों को आगामी महीनों में कुछ कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

राबो बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार दलहनों के दाम एवं निर्यात मार्जिन को मौद्रिक अस्थिरता एवं शिपिंग खर्च बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया से मसूर, चना तथा फाबा बीन्स का निर्यात मुख्यतः दक्षिण एशिया एवं मध्य-पूर्व के देशों में होता है। भारत दलहनों का प्रमुख आयातक देश है।

इस क्षेत्र में अमरीकी टैरिफ वार का अभी ज्यादा असर नहीं है और खासकर दलहनों के आयात में कोई गंभीर समस्या नहीं देखी जा रही है।

लेकिन अमरीका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध तथा चीन द्वारा कनाडा की मटर पर लगाए गए 100 प्रतिशत के सीमा शुल्क का असर वैश्विक बाजार पर पड़ने की आशंका है। 

हालांकि चना एवं मसूर की तुलना में ऑस्ट्रेलिया से मटर का निर्यात बहुत कम होता है लेकिन यदि चाइनीज बाजार में अच्छा स्कोप नजर आया तो ऑस्ट्रेलिया के किसान इसकी खेती पर विशेष ध्यान दे सकते हैं।

भारत मसूर का आयात जारी रख सकता है लेकिन चना का आयात सीमित रखने का प्रयास करेगा। बांग्ला देश, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं नेपाल जैसे अन्य आयातक देशों की मुद्रा अमरीकी डॉलर के सापेक्ष बहुत कमजोर हो गई है इसलिए वहां मसूर और चना का आयात सोच-समझकर किया जा सकता है।

एक अन्य मुद्दा परिवहन खर्च का है। यदि ऑस्ट्रेलिया में दलहनों का भाव तथा शिपमेंट खर्च बढ़ता है तो इन आयातक देशों को आयात बढ़ाने में भारी कठिनाई हो सकती है।

अमरीका और कनाडा अपनी मटर तथा मसूर का निर्यात एशियाई देशों में बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन यह देखना आवश्यक होगा कि उसके उत्पाद का निर्यात ऑफर मूल्य ऑस्ट्रेलिया की तुलना में प्रतिस्पर्धी रहता है या नहीं।

भारत के चना तथा मसूर पर 11-11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया है जबकि पीली मटर पर फैसला होना अभी बाकी है। भारत में 2024-25 के दौरान चना का रिकॉर्ड आयात हुआ।