विदेशों से सस्ते आयात के कारण दलहनों का बाजार भाव नरम
27-Aug-2025 04:11 PM
मुम्बई। विदेशों और खासकर म्यांमार, मोजाम्बिक, तंजानिया तथा कनाडा आदि से सस्ते माल का भारी आयात जारी रहने और अगले कुछ सप्ताहों में नई घरेलू खरीद कालीन फसल की आवक शुरू होने की संभावना से प्रमुख दलहनों- तुवर, उड़द, मसूर एवं चना आदि का बाजार भाव नरम पड़ गया है और कुछ मंडियों में यह घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे आ गया।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार उड़द और चना का थोक मंडी भाव फिलहाल अपने-अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास चल रहा है जबकि विदेशों से आयातित तुवर एवं मसूर का दाम एमएसपी से 10-20 प्रतिशत नीचे आ गया है। यद्यपि देश में बाहर से मूंग का आयात नहीं हो रहा है लेकिन फिर भी इसकी कीमत एमएसपी से नीचे चल रही है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक कमजोर बाजार भाव से दलहन उत्पादक आगामी रबी सीजन में चना तथा मसूर की खेती से हतोत्साहित हो सकते हैं।
यदि मंडी भाव एमएसपी से नीचे रहा तो दलहनों की बिजाई में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट जाएगा और फिर अगले साल विदेशों से दलहनों के आयात पर निर्भरता बढ़ जाएगी।
उद्योग व्यापार क्षेत्र ने सरकार से पीली मटर तथा अन्य किस्मों के दलहनों के आयात को नियंत्रित करने हेतु उस पर सीमा शुल्क लगाने / बढ़ाने का आग्रह किया है।
चना तथा मसूर पर 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है जबकि तुवर, पीली मटर एवं उड़द का आयात 31 मार्च 2026 तक शुल्क मुक्त कर दिया गया है।
समीक्षकों का कहना है कि दलहनों पर इस तरह से सीमा शुल्क लगाया जाए कि इसका आयात खर्च एमएसपी से ऊंचा रहे तभी किसानों को उत्पादन बढ़ाने का समुचित प्रोत्साहन मिल सकता है।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए दलहनों के आयात को नियंत्रित करना आवश्यक है।
इसके लिए न केवल सीमा शुल्क में वृद्धि होनी चाहिए बल्कि किसानों को आवश्यक सहयोग-समर्थन और प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में दलहनों का आयात उछलकर 70 लाख टन से भी ऊपर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। देश में दलहनों की जितनी वार्षिक खपत होती है उसके 15-18 प्रतिशत मात्रा का विदेशों से आयात किया जा रहा है।
