यूरोपीय संघ द्वारा भारत को जीआई टैग देने पर पाकिस्तान से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका

22-May-2024 08:21 PM

चंडीगढ़ । यूरोपीय संघ में जिस तरह का परिदृश्य बन रहा है उसे देखते हुए प्रतीत होता है कि वह शीघ्र ही भारत को बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेतक का दर्जा (जीआई टैग) प्रदान कर सकता है।

इस बीच इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीटयूट (इपरी) द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यूरोपीय संघ भारत को जीआई टैग देता है तो उसके बाजार में पाकिस्तानी बासमती  चावल का निर्यात बुरी तरह बाधित हो सकता है। 

इपरी की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान को इस मामले में पारस्परिक हितों के आधार पर तत्काल नेपाल एवं बांग्ला देश जैसे अन्य देशों को सक्रियता से संलग्न करने की आवश्यकता है ताकि बासमती चावल के लिए जी आई टैग हेतु भारत के दावे को सीमित या कमजोर किया जा सके।

बासमती धान-चावल को आमतौर पर भरतीय उपमहाद्वीप की सामान्य धरोहर (विरासत) माना जाता है और इसलिए इस पर भारत के एकाधिकार को रोकना बेहद जरुरी है।

जैसे जानकारों का मानना है कि नेपाल तथा बांग्ला देश इस मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं देना चाहेगा क्योंकि वहां घोषित रूप से बासमती चावल का उत्पादन नहीं होता है और न ही उसने कभी जी आई टैग के लिए भारत के दावे का विरोध किया।

बासमती धान की खेती भारत के खास क्षेत्र में होती है और स्वयं सरकार ने देश के अन्य भागों में उत्पादित होने वाले इससे मिलते जुलते किस्म के धान-चावल को बासमती की मान्यता देने से इंकार कर दिया है। ऐसी हालत में नेपाल तथा बांग्ला देश यदि पाकिस्तान के साथ खड़ा होता है तब भी भारतीय दावे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन सभी देशों में पाकिस्तान को निश्चित रूप से क़ानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहना होगा जहां भारत बासमती चावल के लिए जी आई टैग का दावा प्रस्तुत करेगा,

भले ही वहां पाकिस्तानी बासमती चावल का निर्यात नहीं या बहुत कम होता हो। इससे उन देशों में यदि कभी भारत से चावल का निर्यात घटता है तो पाकिस्तान को इस अंतर को पाटने में सहायता मिलेगी।