आगामी महीनों में तुवर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद

14-Nov-2024 07:05 PM

नई दिल्ली । पिछले कुछ वर्षों से अरहर (तुवर) के घरेलू उत्पादन में गिरावट का दौर जारी रहा है। वर्ष 2020 के खरीफ सीजन में इसका उत्पादन बढ़कर 43.20 लाख टन पर पहुंचा था जो 2022 में 10 लाख टन घटकर 33.10 लाख टन पर आ गया।

2023 के सीजन में यह सुधरकर 34.20 लाख टन पर पहुंचा जबकि 2024 के वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन में उत्पादन कुछ और बढ़कर 35 लाख टन से ऊपर पहुंच जाने का अनुमान है।

एक अग्रणी विश्लेषक एवं आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि वर्षों तक गिरावट के बाद तुवर का घरेलू उत्पादन अब स्थिर होने लगा है। इस बार गत वर्ष के मुकाबले इसके बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई।

राहुल चौहान के मुताबिक कर्नाटक में अगैती बिजाई वाली तुवर की नई फसल की छिटपुट कटाई तथा मंडियों में आवक शुरू हो गई है जबकि जनवरी-फरवरी में महाराष्ट्र सहित अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में नई तुवर की भारी आपूर्ति होने लगेगी

इसलिए आगामी महीनों के दौरान घरेलू प्रभाग में इसकी उपलब्धता की स्थिति बेहतर रहने के आसार हैं। सरकार ने तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 सीजन के लिए 7550 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया है। 

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर का कहना है कि भारत में दिसम्बर के बाद नई तुवर की जोरदार आपूर्ति होने की उम्मीद है जबकि म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों से इसका आयात भी जारी रहेगा।

ऐसी हालत में निकट भविष्य में तुवर की आपूर्ति बेहतर होगी जिससे कीमतों में थोड़ी नरमी आ सकती है। संक्षेप में कहा जाए तो वर्तमान समय में भारत में तुवर के बाजार में मिश्रित परिदृश्य बना हुआ है। वर्षों के बाद इसके उत्पादन में स्थिरता आने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ अनुकूल मौसम के कारण फसल की उपज दर में भी कुछ सुधार आने के आसार हैं।

लेकिन इसके बावजूद विदेशों से होने वाला आयात महत्वपूर्ण  भूमिका निभाएगा। अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ने पर तुवर के दाम पर दबाव पड़ सकता है।

तुवर का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है लेकिन अगले कुछ महीनों में हालात बदल सकते हैं। म्यांमार से आगामी महीनों में होने वाला आयात भारतीय तुवर बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।