आई-ग्रेन इंडिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: भारत में मसूर की खपत बढ़ी, आयात और उत्पादन में भी हुआ इज़ाफ़ा

14-May-2025 01:34 PM

आई-ग्रेन इंडिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: भारत में मसूर की खपत बढ़ी, आयात और उत्पादन में भी हुआ इज़ाफ़ा
★ 2021-22 से 2024-25 तक के आंकड़ों का विश्लेषण
★ भारत में मसूर के उत्पादन, आयात, खपत और भंडारण में बीते वर्षों में बड़ा बदलाव देखा गया है। तेजी से बढ़ती मांग के कारण घरेलू उत्पादन और आयात ★ दोनों में इज़ाफ़ा हुआ है, जिससे मसूर बाजार की दिशा को लेकर नए संकेत मिल रहे हैं।
उत्पादन में स्थिर बढ़ोतरी
★ 2021-22 में मसूर का उत्पादन 14.9 लाख टन रहा, जो 2024-25 तक बढ़कर 17 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह चार वर्षों में लगभग 14% की वृद्धि है।
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आयात में उतार-चढ़ाव लेकिन अभी भी ऊँचा स्तर
★ 2021-22 में 11.2 लाख टन मसूर का आयात हुआ था, जो 2022-23 में घटकर 6.7 लाख टन रह गया। हालांकि इसके बाद आयात दोबारा बढ़कर 2023-24 में 16 लाख टन और 2024-25 में 12.1 लाख टन रहने की उम्मीद है।
★ घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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खपत में बढ़ी
★ बढ़ती जनसंख्या और उपभोक्ता मांग के चलते मसूर की खपत में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
★ 2021-22 में यह 22 लाख टन थी, जो 2024-25 तक 28 लाख टन तक पहुंच सकती है। यह 4 वर्षों में लगभग 27% की वृद्धि है।
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स्टॉक स्तर स्थिर
★ मसूर का बकाया स्टॉक 2021-22 में 5.4 लाख टन था, जो 2022-23 में घटकर 1.7 लाख टन रह गया। 2023-24 और 2024-25 में यह क्रमशः 7.2 और 7 लाख टन रहा।
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निर्यात मामूली लेकिन स्थिर
★ भारत का मसूर निर्यात बहुत सीमित। 
★ 2021-22 और 2022-23 में केवल 20,000 टन, जबकि 2023-24 और 2024-25 में 1.5 और 1.3 लाख टन निर्यात होने की संभावना है।
★ जब घरेलु कीमतें घटी हैं तब बांग्लादेश में बढ़ता है निर्यात।
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भविष्य में बाज़ारों का रुख
★ भविष्य में सरकार स्टॉक नियंत्रण, निर्यात प्रोत्साहन या आयात नीति में बदलाव जैसे कदम उठा सकती है ताकि बाजार संतुलित रह सके।
★ अभी हाल ही में मसूर आयात शुल्क 10% लगाया गया, परन्तु उस समय तक कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में बढ़ी मात्रा में हो चूका था निर्यात। 
★ दोनों देशों में स्टॉक कम और बिजाई चालू। 
★ कनाडा में एरिया बढ़ने और ऑस्ट्रेलिया में स्थिर रहने की उम्मीद। नई फसल आने में 4 महीने शेष। 
★ आयात घटा तो भविष्य में कीमतों में और सुधार आने की उम्मीद।
★ खपत को पूरा करने के लिए कुल दलहनों के आयात में % पैन मसूर की हिस्सेदारी सबसे अधिक।