आई-ग्रेन इंडिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: भारत में देसी चने का उत्पादन, मांग और भंडार में वृद्धि: कैसे रहेंगे बाजार पड़े रिपोर्ट

14-May-2025 01:29 PM

आई-ग्रेन इंडिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: भारत में देसी चने का उत्पादन, मांग और भंडार में वृद्धि: कैसे रहेंगे बाजार पड़े रिपोर्ट
★ देसी चना के उत्पादन, मांग और आयात में बीते वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले।

पिछले 5 वर्षों का विश्लेषण:
★ उत्पादन में स्थिरता, लेकिन गिरावट के बाद सुधार। 
★ देसी चने का उत्पादन R 21 में 85 लाख टन रहा था, जो R 22 में 90 लाख टन तक पहुंचा।
★ इसके बाद दो वर्षों तक इसमें गिरावट दर्ज की गई और R 24 में यह घटकर 80 लाख टन रह गया। हालांकि, R 25 में यह फिर से सुधरकर 85 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान।
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आयात में उछाल, ऑस्ट्रेलिया रहा प्रमुख स्रोत
★ बिना शुल्क के आयात की अनुमति दिए जाने के बाद आयात में तेज़ उछाल आया। R 25 में देश का चना आयात 12.1 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि R 23 में यह सिर्फ 60,000 टन था।
★ ऑस्ट्रेलिया से बड़ी मात्रा में आयात हुआ। हालांकि हाल ही में 10% आयात शुल्क लगाया गया, लेकिन उसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि अधिकांश आयात पहले ही हो चुका था।
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बढ़ती जनसंख्या के साथ खपत में भी बढ़ोतरी
★ चना की घरेलू खपत लगातार बढ़ रही है। R 21 में जहां यह 80 लाख टन थी, वहीं R 25 में यह 87 लाख टन तक पहुंच सकती है। हालांकि R 23 और R 24 में मटर के बढ़े हुए आयात ने चने की खपत पर कुछ हद तक कम रही।
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रिकॉर्ड स्टॉक, लेकिन सरकारी खरीद कमजोर
★ बढ़ी हुई पैदावार और भारी आयात के चलते देश का अंतिम भंडार R 21 के 20.9 लाख टन से बढ़कर R 25 में 36.2 लाख टन सकता है।
★ हालांकि, बीते दो वर्षों से बाजार में भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बराबर या अधिक रहने के कारण सरकारी खरीद कमजोर रही है। इस वर्ष अनुमान है कि खरीद महज़ 1.25 लाख टन तक सिमट सकती है।
★ इससे सरकारी बिक्री की संभावना भी सीमित रहेगी और बाजार में मांग और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
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अंतरराष्ट्रीय स्थिति और संभावनाएं
★ ऑस्ट्रेलिया में चने का पुराना स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है और नई फसल की बुवाई शुरू हो चुकी है। उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है, लेकिन नई फसल आने में अभी लगभग 4 महीने बाकी हैं।
★ इस बीच, अफ्रीका से थोड़ी मात्रा में नई फसल का आयात संभव है।
★ भारत में चालू सीजन में नई फसल के बावजूद मिलर्स और स्टॉकिस्ट्स ने भरपूर खरीदारी की है क्योंकि पाइपलाइन लगभग खाली थी।
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क्या होंगे सरकारी कदम?
★ तेजी से बढ़ रहे स्टॉक और मांग को देखते हुए, भविष्य में चने के भाव मजबूत बने रहने की संभावना है।
★ अब देखना यह होगा कि सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कौन-से कदम उठाती है — जैसे स्टॉक लिमिट लागू करना, मटर आयात की समयसीमा बढ़ाना आदि।