आपूर्ति एवं उपलब्धता की सुगम स्थिति से तुवर का भाव नरम

10-Jun-2025 03:49 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत किसानों से भारी मात्रा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तुवर की खरीद की गई है लेकिन फिर भी इसके थोक मंडी भाव में तेजी की कोई सुगबुगाहट नहीं देखी जा रही है। तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार 7550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है जबकि मंडी भाव इससे 10-12 प्रतिशत नीचे चल रहा है। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक एक तो 2024-25 सीजन के दौरान तुवर का घरेलू उत्पादन बेहतर रहा और दूसरे वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) में 12 लाख टन से अधिक तुवर का रिकॉर्ड आयात भी किया गया। म्यांमार तथा अफ्रीकी देशों से विशाल मात्रा में सस्ते दाम पर आयात होने से तुवर का भाव नरम पड़ गया। फरवरी 2025 से खुदरा मूल्य में 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है जबकि अप्रैल 2024 की तुलना में अप्रैल 2025 के दौरान तुवर में महंगाई दर ऋणात्मक हो गई है।

अरहर या तुवर को एक प्रीमियम क्वालिटी का दलहन माना जाता है। केन्द्र सरकार की अधीनस्थ एजेंसी- नैफेड एवं एनसीसीएफ द्वारा चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं गुजरात जैसे राज्यों में किसानों से 5.90 लाख टन तुवर की खरीद पहले ही की जा चुकी है जो 2017-18 की रिकॉर्ड खरीद के बाद दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार केन्द्र सरकार 31 मार्च 2026 तक तुवर के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति पहले ही प्रदान कर चुकी है जिसके सहारे म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों से इसका निर्बाध आयात हो रहा है। 

समीक्षकों के अनुसार घरेलू थोक मंडियों में कहीं-कहीं तुवर का भाव घटकर 6600 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है जबकि म्यांमार से आयातित तुवर का खर्च 6220 रुपए प्रति क्विंटल तथा अफ्रीकी देशों से आयातित तुवर का खर्च 5600 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। लातूर के व्यापारी का कहना है कि आपूर्ति एवं उपलब्धता की तुलना में तुवर की मांग कमजोर है। सरकार के पास भी इसका भारी स्टॉक मौजूद है जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है। म्यांमार से इसका निर्बाध आयात जारी है जबकि दो-तीन महीने के बाद अफ्रीका से भी नया आयात आरंभ हो जाएगा।