अगले मार्केटिंग सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन बढ़ने के आसार

08-May-2025 11:21 AM

नई दिल्ली। भारत में 2023-24 सीजन के दौरान 319 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था जो 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में करीब 58 लाख टन घटकर 261 लाख टन के आसपास अटक जाने की संभावना है। लेकिन 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। 

अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) के नई दिल्ली स्थित प्रतिनिधि कार्यालय (पोस्ट) ने भारत में चीनी का कुल उत्पादन 2024-25 सीजन के 280 लाख टन से करीब 26 प्रतिशत उछलकर 2025-26 के सीजन में 350 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जिसमें एथनॉल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मात्रा भी शामिल है।

उस्डा पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार गन्ना के बिजाई क्षेत्र में इजाफा होने की उम्मीद है और पिछले साल मानसून सीजन के दौरान काफी अच्छी बारिश होने से लम्बी अवधि में परिपक्व होने वाली फसल को काफी फायदा हुआ जिससे इसकी उपज दर में बढ़ोत्तरी होगी। अक्टूबर 2025 से आरंभ होने वाले मार्केटिंग सीजन में चीनी मिलों को गन्ना की पर्याप्त आपूर्ति नियमित रूप से होती रहेगी। 

उस्डा पोस्ट ने 2025-26 सीजन के लिए रॉ वैल्यू आधार पर जो 350 लाख टन कच्ची चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया है वह 330 लाख टन रवेदार (क्रिस्टल) चीनी के समतुल्य हैं जिसमें 60 हजार टन खांडसारी भी शामिल है। इसमें से कितनी मात्रा का उपयोग एथनॉल उत्पादन में किया जाएगा यह देखना आवश्यक होगा। 

वर्ष 2024 के मानसून सीजन में अच्छी वर्षा होने से गन्ना की फसल को प्रत्यक्ष रूप से फायदा हुआ और साथ ही साथ भू जल तथा बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर भी ऊंचा हो गया।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्यों में चालू वर्ष के दौरान फसल की पैदावार बेहतर होने के आसार हैं जिससे चीनी मिलों को इसकी अधिक आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

गत वर्ष की अच्छी बारिश से खास कर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में किसानों को गन्ना का क्षेत्रफल बढ़ाने में काफी सहायता मिली। इसके फलस्वरूप चालू वर्ष के दौरान गन्ना की औसत उपज दर तथा गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर भी बढ़ने के आसार हैं।

उस्डा पोस्ट के अनुसार 2024-25 के सीजन में भारत में गन्ना का कुल उत्पादन क्षेत्र 53.60 लाख हेक्टेयर रहा जो 2025-26 के सीजन में करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 58.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंच जाने का अनुमान है। इससे चीनी का उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।