अगस्त की भांति सितम्बर में भी मानसून की गतिशीलता बरकरार रहने का अनुमान
01-Sep-2025 03:31 PM
नई दिल्ली। अगस्त माह के दौरान देश के उत्तरी एवं दक्षिणी भाग के अधिकांश क्षेत्रों में रिकॉर्ड बारिश होने के बाद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सितम्बर में भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्रता एवं गतिशीलता बरकरार रहने का अनुमान लगाया है जिससे कई इलाकों में जोरदार वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी।
आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार सितम्बर माह के दौरान अखिल भारतीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष 109 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है।
पहाड़ी राज्यों में बादल फटने, लैंड स्लाइड (भू स्खलन) होने तथा चट्टानों के दरकने से स्थिति पहले से ही काफी खराब बनी हुई है जबकि सितम्बर की जोरदार बारिश से हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
अगस्त माह के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहा। सितम्बर अधिशेष वर्षा मैदानी इलाकों में खरीफ फसलों की भारी बर्बादी का कारण बन सकती है क्योंकि खेतों में पानी भरा रह सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 22 अगस्त तक देश में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 1073.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र से 35.40 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इसके तहत खासकर धान तथा मक्का के क्षेत्रफल में शानदार बढ़ोत्तरी हुई है। बिजाई की प्रक्रिया कुछ क्षेत्रों में अभी जारी है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार माह की अवधि में से तीन माह समाप्त हो चुका है और अब चौथा महीना- सितम्बर आरंभ हो गया है। इस माह के लिए मानसूनी वर्षा का दीर्घकालीन औसत 167.9 मि० मी० आंका गया है
जबकि वास्तविक बारिश इससे 9 प्रतिशत अधिक हो सकती है। चालू माह के दौरान केवल पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ भागों, सुदूर दक्षिणी प्रायद्वीप एवं पश्चिमोत्तर भारत के कुछ इलाकों को छोड़कर देश के शेष हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक कम से कम अगले दो सप्ताहों तक देश से मानसून की वापसी का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। कुछ अधिक संख्या में कम दाब का क्षेत्र बनने की संभावना दिख रही है। सितम्बर माह में अब ज्यादा बारिश होने लगी है।
