अमरीका में भारतीय चावल का निर्यात प्रभावित होने की संभावना कम

08-Apr-2025 12:52 PM

नई दिल्ली। अमरीका में भारतीय चावल के आयात पर 26 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है जिससे वहां इसके निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था लेकिन अन्य अपूर्तिकर्ता देशों के चावल पर इससे ऊंची दर का आयात शुल्क लगाए जाने से भारत को कुछ अतिरिक्त लाभ मिल जाएगा। थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान एवं चीन आदि देशों के चावल पर भारत से ऊंचा आयात शुल्क लगाया गया है। 


केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार भारत के कुल बासमती चावल निर्यात में अमरीकी आयात की भागीदारी 5 प्रतिशत रहती है।


अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के दस महीनों में भारत से अमरीका को 2,30,643 टन बासमती चावल तथा 51,334 टन गैर बासमती चावल का शिपमेंट किया गया।


एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से अमरीका को 2,34,469 टन चावल भेजा गया था जो 2022-23 के कुल निर्यात से 30,444 टन अधिक था। 


बासमती चावल के अग्रणी निर्यातक के अनुसार अमरीका ने वियतनामी चावल पर 46 प्रतिशत तथा थाई चावल पर 36 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू किया है।


शुरूआती दौर में इन देशों के साथ भारत को भी अमरीका में चावल का निर्यात करने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है लेकिन भविष्य में भारत को इससे फायदा हो सकता है।


भारतीय चावल का दाम प्रतिस्पर्धी रहता है जब उसे अमरीकी बाजार में अपेक्षाकृत नीचे स्तर के सीमा शुल्क का सामना करना पड़ेगा। उधर अमरीका को भी महंगे आयात के कारण महंगाई की तपिश महसूस होगी।


सीमा शुल्क में हुई बढ़ोत्तरी से अमरीकी राजस्व तो बढ़ेगा मगर साथ-साथ आम लोगों की कठिनाई भी बढ़ जाएगी। मौजूदा अनुबंधों के लिए आयातकों- निर्यातकों में बातचीत हो सकती है। पाकिस्तानी चावल पर 29 प्रतिशत तथा कम्बोडियाई चावल पर 49 प्रतिशत का आयात शुल्क अमरीका में लगाया गया।