अमरीका में चावल की डम्पिंग के आरोप से भारत का इंकार
23-Dec-2025 04:26 PM
नई दिल्ली। भारत ने अमरीका के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया है कि भारत अमरीकी बाजार में अपने चावल का विशाल स्टॉक उतारकर वहां इसकी डम्पिंग (जमावड़ा) कर रहा है।
भारत का कहना है कि वह अमरीका को मुख्य्तः प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल का निर्यात करता है और इसकी मात्रा सीमित रहती है। अमरीकी आयातक भारत से उतना ही चावल मंगाते हैं जितना वहां आवश्यक माना जाता है।
केन्द्रीय वाणिज्य सचिव के अनुसार भारत से अमरीका को जितना चावल भेजा जाता है उसमें लम्बे दाने एवं ऊंचे मूल्य वाले प्रीमियम क्वालिटी के सुगंधित चावल का योगदान 80 प्रतिशत से ज्यादा रहता है।
इस चावल की कीमत गैर बासमती चावल से काफी ऊंची होती है। भारत से अमरीका को मामूली मात्रा में गैर बासमती सफेद (कच्चे) चावल का निर्यात किया जाता है। अतः अमरीकी बाजार में भारतीय चावल की डम्पिंग का आरोप बिल्कुल निराधार है।
वाणिज्य सचिव के मुताबिक भारत अमरीका और जिस बासमती का निर्यात करता है वह एक जीआई उत्पाद है और सामान्य श्रेणी के चावल से काफी महंगा होता है।
प्रथम द्रष्टया वहां भारतीय चावल की डम्पिंग का कोई मामला नहीं बनता है। वैसे भी अमरीका में भारतीय चावल के आयात पर पहले ही 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगाया जा चुका है।
वाणिज्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि अमरीकी प्रशासन ने भारतीय चावल की डम्पिंग के खिलाफ कोई जांच-पड़ताल शुरू नहीं की है और न ही किसी तरह की कार्रवाई होने की सूचना मिली है।
दरअसल अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था अगर चावल की डम्पिंग का मामला सामने आया तो इस पर आयात शुल्क और बढ़ाया जा सकता है।
भारतीय निर्यातक अमरीका में चावल पर लगे 50 प्रतिशत की ऊंचे आयात शुल्क से कुछ मायूस अवश्य हैं लेकिन साथ ही उनका कहना है कि इससे भारत के सम्पूर्ण चावल निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसके विकल्प के रूप में कुछ नए बाजार सामने आ सकते हैं जिसकी जोरदार तलाश आरंभ हो चुकी है।
