अमरीकी उत्पादों पर 20-25 प्रतिशत का आयात शुल्क रखने की तैयारी
30-Jul-2025 01:35 PM
नई दिल्ली। भारत सरकार अस्थायी उपाय के तहत अमरीका के चुनिंदा उत्पादों पर आयात शुल्क की ऊंची दर को घटाने की तैयारी कर रही है ताकि दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में प्रगति हो सके और किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके।
समझा जाता है कि व्यापार वार्ता के क्रम में भारत कुछ लचीला रुख अपना सकता है और चुनिंदा अमरीकी उत्पादों / सामानों पर शुल्क की दर घटाकर 20-25 प्रतिशत नियत कर सकता है।
अमरीका ने 1 अगस्त से विभिन्न देशों पर नया टैरिफ लागू करने की घोषणा की थी। यह तिथि अत्यन्त निकट आ चुकी है और इसलिए भारत को जल्दी ही कोई फैसला करना पड़ सकता है।
लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि भारत इस 1 अगस्त की डेड लाइन से ज्यादा चिंतित नहीं है और न ही जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना चाहता है।
इसके बजाए मध्य अगस्त में अमरीका वार्ताकारों का दल जब भारत आएगा तब उसके साथ विस्तृत व्यापारिक चर्चा करने का इच्छुक है। भारत का उद्देश्य एक व्यापाक एवं समेकित द्विपक्षीय व्यापारिक करार करने का है जिसे सितम्बर या अक्टूबर में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि अमरीका अपने सोयाबीन एवं इसके उत्पादों एवं मक्का का प्रवेश भारतीय बाजारों में सुनिश्चित करवाना चाहता है और इसके लिए वह भारत पर जबरदस्त दबाव डाल रहा है लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है क्योंकि अमरीका में मुख्यत: जीएम श्रेणी के मक्का एवं सोयाबीन का उत्पादन होता है जबकि भारत में इसके उत्पादन, आयात कारोबार तथा उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है।
हालांकि भारत में अफ्रीकी देशों से सोयाबीन एवं म्यांमार जैसे देशों से मक्का का आयात होता है मगर एक तो यह गैर जीएम या परम्परागत श्रेणी का होता है और दूसरे, इसकी मात्रा भी सीमित रहती है। अमरीका इस वास्तविकता से अवगत है लेकिन फिर भी भारत का विशाल बाजार वह हाथ से निकलने नहीं देना चाहता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारत को अमरीका में न्यूनतम शुल्क पर या शून्य शुल्क पर अपने उत्पादों का निर्यात बरकरार रखना है तो उसे कुछ अमरीकी उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती करनी पड़ सकती है
क्योंकि ट्रम्प प्रशासन सीमा शुल्क के मामले में 'जैसे को तैसा' की रणनीति अपना रहा है। यह भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों के लिए मान्य होगी।
