अनाज मंडियों में उत्पीड़न से परेशान किसानों द्वारा आंदोलन की धमकी
14-Nov-2024 04:26 PM
लुधियाना । कृषक अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्यरत विभिन्न संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अनाज मंडियों में झूठे आरोपों एवं बनावटी कारणों के बहाने धान के उत्पादकों का शोषण उत्पीड़न तत्काल बंद नहीं किया गया तो आंदोलन और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
संख्याओं ने पंजाब सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए खरीद एजेंसियों के कार्मिकों पर दबाव बढ़ाने का आग्रह किया है कि गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने वाली फलों की खरीद तत्परता से की जाए और खरीदे गए धान को मंडियों से जल्दी से जल्दी हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए ताकि किसानों को अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने का पर्याप्त समय प्राप्त हो सके।
लुधियाना जिले के एक प्रगतिशील किसान तथा कमीशन एजेंट ने आरोप लगाया है कि खरीद एजेंसियों के कार्मिक तथा प्राइवेट खरीदार छोटी-छोटी बातों को लेकर और झूठे बहानों से धान उत्पादक किसानों को परेशान कर रहे हैं।
कभी वे कहते हैं कि धान में नमी का अंश ज्यादा है तो कभी बारदाना के अभाव का बहाना कर रहे हैं। इससे किसानों को अपने धान की बिक्री के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है।
सरकारी अधिकारी पर्याप्त संख्या में बारदाना (गन्नी बोरियां) उपलब्ध करवाने में असमर्थता व्यक्त कर रहे हैं मगर राइस मिलर्स 20 रुपए प्रति बोरी के भुगतान पर इसके स्टॉक की व्यवस्था करने के लिए तैयार हैं।
उसके अनुसार लाताला अनाज मंडी में पिछले एक सप्ताह के दौरान धान की सरकारी खरीद नहीं हुई है जबकि प्राइवेट व्यापारी एवं मिलर्स नीचे दाम पर धान की खरीद का ऑफर दे रहे हैं। इस प्रगतिशील किसान का 25 हजार बोरी धान मंडियों में पड़ा हुआ है और वह उसकी खरीद शुरू होने का इंजतार कर रहा है।
एक किसान यूनियन का आरोप है कि प्रशासन धान उत्पादकों की उम्मीदों को पूरा करने में असफल रहा है जिससे किसानों को भारी कठिनाई हो रही है।
केन्द्र और पंजाब सरकार बार-बार यह दावा करती रही है कि धान की खरीद के लिए पक्की व्यवस्था की गई है और मंडियों में आने वाले धान के प्रत्येक दाने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी मगर वास्तविक धरातल पर स्थिति विपरीत है।
