अप्रैल 2025 में खाद्य तेल का आयात घटकर 8.62 लाख टन – मई 2020 के बाद सबसे कम: SEA

14-May-2025 12:23 PM

अप्रैल 2025 में खाद्य तेल का आयात घटकर 8.62 लाख टन – मई 2020 के बाद सबसे कम: SEA
★ नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक छमाही आयात में 6% की गिरावट, सोयाबीन तेल के आयात में तेजी, पाम तेल का घटा।
★ अप्रैल 2025 में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात 8.91 लाख टन रहा, जबकि अप्रैल 2024 में यह 13.18 लाख टन था। यानी सालाना आधार पर इसमें 32% की गिरावट आई, इसमें से 8.62 लाख टन खाद्य तेल और 29,000 टन गैर-खाद्य तेल शामिल।
★ तेल वर्ष 2024-25 के पहले छह महीने (नवंबर 2024 से अप्रैल 2025) में कुल वनस्पति तेल आयात 66.98 लाख टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि (71.49 लाख टन) से 6% कम है। इस आंकड़े में नेपाल से होने वाला आयात शामिल नहीं।
★ नेपाल की घरेलू खाद्य तेल मांग लगभग 4.3 लाख टन प्रति वर्ष (करीब 35,000 टन प्रति माह) है, भारतीय आयात शुल्क बढ़ाने के बाद नेपाल ने बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात कर भारत को शून्य शुल्क पर SAFTA समझौते के तहत निर्यात कर रहे हैं।
★ 15 अक्टूबर 2024 से 15 अप्रैल 2025 के बीच नेपाल ने लगभग 5.80 लाख टन कच्चा सोयाबीन व सूरजमुखी तेल आयात किया और लगभग 3.50 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल भारत को निर्यात किया।
★ SEA ने इस मुद्दे को वाणिज्य मंत्री और उपभोक्ता मामलों के मंत्री के समक्ष उठाया है और शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
~~~~~~~~~~~~
★ देश में 1 मई 2025 को कुल खाद्य तेल का स्टॉक 13.51 लाख टन था, जबकि 1 अप्रैल 2025 को यह 16.66 लाख टन था। यानी सिर्फ एक महीने में स्टॉक में 3.15 लाख टन की गिरावट हुई है।
★ इसमें बंदरगाहों पर स्टॉक 7 लाख टन है जिसमें क्रूड पाम ऑयल (CPO) 1.55, RBD पामोलीन की 1.10, डीगम्ड सोयाबीन ऑयल 1.35 लाख टन और ★ क्रूड सूरजमुखी तेल मात्रा 3 लाख टन शामिल हैं इसके अलावा पाइपलाइन स्टॉक (घरेलू उत्पादन व उपभोग मिलाकर) में स्टॉक 6.51 लाख टन भी।
~~~~~~~~~~~~
★ नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 5.76 लाख टन कच्चा तेल और 7.39 लाख टन रिफाइंड तेल का आयात हुआ। पिछले वर्ष समान अवधि में यह क्रमशः 6.06 और 10.10 लाख टन था।
★ इस दौरान रिफाइंड तेल का कुल हिस्सा 14% से घटकर 11% हो गया, जबकि कच्चे तेल का हिस्सा 86% से बढ़कर 89% हो गया।
★ पाम ऑयल आयात घटकर 27.37 लाख टन (पिछले साल 42.14 लाख टन),  सॉफ्ट ऑयल (सोयाबीन और सूरजमुखी) बढ़कर 37.65 लाख टन (पिछले साल 28.56 लाख टन) पहुंचा।