अरंडी की कम अवधि वाली किस्मों के विकास का प्रयास

01-Jul-2026 03:50 PM

राजकोट। प्राइवेट क्षेत्र की एक अग्रणी औलियो कैमिकल कम्पनी फिलहाल कुछ अनुसंधान केन्द्रों के साथ मिलकर अरंडी की ऐसी किस्मों के विकास पर काम कर रही है जिसकी फसल कम समय में पककर तैयार हो जाए।

आमतौर पर गुजरात में अरंडी की जिन प्रजातियों की खेती होती है उसे पकने में बहुत लम्बा समय लग जाता है। जुलाई-अगस्त में उसकी बिजाई होती है और जनवरी-फरवरी में वह कटाई के लिए तैयार होती है। 

गुजरात के अलावा राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी अरंडी का व्यावसायिक उत्पादन होता है। कम्पनी के चेयरमैन का कहना है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अधीनस्थ संस्था- भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान से इस सम्बन्ध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया है

और सरकार कांटीवाड़ा, दांतीवाड़ा विश्वविद्यालय के साथ अरंडी की कम परिपक्वता अवधि वाली किस्मों के विकास के लिए मिलकर काम किया जा रहा है। यदि कम समय में पकने वाली अरंडी की किस्मों का विकास हो गया तो किसानों को इसकी खेती के बाद दूसरी फसल लेने का मौका भी मिल जाएगा।