भारत में उत्पादन घटने की आशंका से रूई के वैश्विक मूल्य में सुधार
01-Jul-2026 04:23 PM
न्यूयार्क। अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून के कारण इस वर्ष भारत में न केवल कपास के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट देखी जा रही है बल्कि बोई गई फसल की प्रगति को लेकर भी गंभीर चिंता बनी हुई है।
जानकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो रूई के घरेलू उत्पादन में काफी गिरावट आ सकती है और मांग तथा जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से इसका आयात बढ़ाना पड़ सकता है।
न्यूयार्क स्थित इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में पिछले दिन रूई के वायदा मूल्य में कुछ सुधार देखा गया जिसका एक कारण भारत में फसल के प्रति चिंता भी माना जा रहा है।
वैसे कुछ खास कारणों से रूई के दाम में जोरदार तेजी नहीं आ सकी। उधर अमरीका में कपास का उत्पादन क्षेत्र उम्मीद से कुछ अधिक होने की वजह से भी रूई बाजार में सीमित तेजी आ सकी।
आईसीई में सर्वाधिक सक्रिय माह दिसम्बर की डिलीवरी के लिए रूई का वायदा अनुबंध मूल्य 0.35 सेंट की बढ़ोत्तरी के साथ 76.80 सेंट प्रति पौंड पर बंद हुआ। इस वृद्धि के बावजूद पूरे जून माह के दौरान अनुबंध मूल्य में 279 बिंदु की गिरावट आ गई। भारत में 25 टन तक कपास का रकबा 29.66 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका।
