News Capsule/न्यूज कैप्सूल: सोयाबीन बुवाई में तेजी की उम्मीद, SOPA के सर्वे में सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक रकबा

01-Jul-2026 04:05 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: सोयाबीन बुवाई में तेजी की उम्मीद, SOPA के सर्वे में सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक रकबा
★ SOPA द्वारा 30 जून 2026 तक किए गए त्वरित सर्वेक्षण के अनुसार, खरीफ 2026 में बुवाई सरकारी आंकड़ों की तुलना में काफी आगे बढ़ चुकी है। अनुमान है कि 30 जून तक देश में 28.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है, जबकि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में यह रकबा 6.92 लाख हेक्टेयर बताया गया है। SOPA के अनुसार सरकारी आंकड़ों में सामान्यतः 7–10 दिनों की रिपोर्टिंग देरी रहती है, जिससे दोनों अनुमानों में अंतर दिखाई देता है।
★ राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में सरकार ने 4.30 लाख हेक्टेयर बुवाई दर्ज की है, जबकि SOPA का अनुमान 15.56 लाख हेक्टेयर है। महाराष्ट्र में सरकारी अनुमान 1.19 लाख हेक्टेयर के मुकाबले SOPA ने 8.45 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 0.63 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.50 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 0.15 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.247 लाख हेक्टेयर तथा गुजरात में 0.154 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.856 लाख हेक्टेयर बुवाई का अनुमान लगाया है। कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में दोनों अनुमानों के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम है।
★ SOPA के अनुसार मानसून में देरी के कारण इस वर्ष सोयाबीन की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में देर से शुरू हुई। हालांकि, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा होने से बुवाई ने तेजी पकड़ ली है और उम्मीद है कि 15 जुलाई तक पूरे राज्य में बुवाई पूरी हो जाएगी।
★ महाराष्ट्र में पर्याप्त मिट्टी की नमी नहीं होने के कारण बुवाई की रफ्तार अभी धीमी है। कई जिलों में 40–50% क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ जिलों में केवल 5–10% क्षेत्र में ही बुवाई हुई है। आगे की प्रगति पूरी तरह आगामी वर्षा पर निर्भर करेगी।
★ राजस्थान में अब तक लक्ष्य क्षेत्र का लगभग 35–40% हिस्सा सोयाबीन की बुवाई के दायरे में आ चुका है। वहीं अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी बुवाई संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है।
★ SOPA का अनुमान है कि इस वर्ष देश में सोयाबीन का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष से अधिक रहेगा। पिछले वर्ष मक्का की ओर रुख करने वाले कई किसानों ने इस बार बेहतर सोयाबीन कीमतों के कारण फिर से सोयाबीन की खेती अपनाई है। हालांकि, अंतिम उत्पादन अगले तीन महीनों में मानसून के वितरण और वर्षा की स्थिति पर निर्भर करेगा।