अरंडी के उत्पादन में 8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान

17-Feb-2025 09:02 PM

अहमदाबाद। ऊंची उपज दर के बावजूद अरंडी का घरेलू उत्पादन पिछले सीजन से इस बार कुछ कम होने की संभावना है। क्योंकि इसके बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई थी।

गुजरात में आयोजित ग्लोबल कैस्टर कांफ्रेंस 2025 में सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने जो सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत किया उससे पता चलता है कि 2023-24 सीजन के अंतिम समीक्षित अनुमान की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान अरंडी का घरेलू उत्पादन 8 प्रतिशत घटकर 18.22 लाख टन रह गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक चारों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में अरंडी की पैदावार में गिरावट  आई है।

सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- गुजरात में अरंडी का उत्पादन 6 प्रतिशत गिरकर 14.75 लाख टन तथा राजस्थान में 9 प्रतिशत घटकर 2.85 लाख टन रह जाने की संभावना है।

इसी तरह आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में अरंडी का संयुक्त उत्पादन 33 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 54 हजार टन पर अटकने का अनुमान लगाया गया है। 

रिपोर्ट के अनुसार अरंडी फसल की अधिकांश बिजाई जुलाई-अगस्त 2024 में ही पूरी हो गई थी लेकिन अगस्त के दूसरे पखवाड़े में अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने तथा कुछ इलाकों में भयंकर बाढ़ आने से गुजरात के सभी प्रमुख उत्पादक जिलों में फसल को काफी नुकसान हो गया।

कई क्षेत्रों में अरंडी के बीच में अंकुरण नहीं हुआ और पौधे भी सड़-गल गए।  इसके  फलस्वरूप कई क्षेत्रों में अगस्त  के दूसरे पखवाड़े से लेकर सितम्बर के प्रथम सप्ताह के बीच किसानों को अरंडी की दोबारा बिजाई करनी पड़ी।

जहां दोबारा बिजाई नहीं हुई वहां फसल की हालात कमजोर बनी रही। वहां पौधों की संख्या कम तथा खर पतवार की भरमार रही।

इसके अलावा अगस्त की मूसलाधार वर्षा से राजस्थान के जोधपुर, जालौर, सिरोही तथा बाड़मेर जिलों में अरंडी की फसल क्षतिग्रस्त हो गई।

वहां किसानों को दो तीन बार बिजाई करनी पड़ी। आंध्र - तेलंगाना में बारिश तो सामान्य हुई मगर अरंडी के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई।