भारी आयात एवं बेहतर उत्पादन की उम्मीद से दलहनों में नरमी आने की संभावना

09-Sep-2024 05:24 PM

नई दिल्ली। खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर अरहर (तुवर) एवं मूंग के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने तथा म्यांमार, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं रूस आदि से भारी आयात जारी रहने की संभावना से घरेलू प्रभाग में दाल-दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर होने तथा कीमतों में कुछ नरमी आने का अनुमान है। वैसे भी पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान सिर्फ देसी चना के दाम में इजाफा हुआ है जबकि अन्य दलहनों का दाम या तो नरम या स्थिर रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार खरीफ कालीन दलहनों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं जबकि अफ्रीका एवं म्यांमार से आयात बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

पिछले दो सप्ताहों के दौरान तुवर, उड़द एवं मसूर आदि के दाम में खेती पर काफी हद तक ब्रेक लगा रहा। उल्लेखनीय है कि दाल-दलहनों में खुदरा महंगाई दर जून 2023 से ही दोहरे अंकों में चल रही है क्योंकि 2023-24 के सीजन में तुवर, उड़द एवं चना जैसे प्रमुख दलहनों का उत्पादन घट गया। 

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दिसम्बर 2024 तक ऑस्ट्रेलिया से देसी चना (बंगाल ग्राम) का आयात उछलकर 10-15 लाख टन के बीच पहुंच जाने की संभावना है

लेकिन यह तभी संभव है जब सरकार इसके शुल्क मुक्त आयात की अवधि को आगे बढ़ाए फिलहाल देसी चना को 31 अक्टूबर 2024 तक आयात शुल्क से मुक्त किया गया है जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसका पिछला बकाया स्टॉक बहुत कम बचा है

और नया माल मध्य अक्टूबर से आना शुरू हो सकता है। मई 2024 में सरकार ने चना के आयात पर लगे 66 प्रतिशत के सीमा शुल्क को वापस ले लिया था। 

देश में दलहनों के कुल उत्पादन में अकेले चना का योगदान 50 प्रतिशत के करीब रहता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022-23 की तुलना में चना का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के दौरान 5.62 प्रतिशत गिरकर 115.70 लाख टन रह गया जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन 90 लाख टन से ज्यादा नहीं हुआ। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार देश में करीब 21 लाख टन पीली मटर का आयात पहले ही हो चुका है जिसे चना के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

घरेलू उत्पादन से भी चना का अच्छा खासा स्टॉक अभी मौजूद है जो धीरे-धीरे बाजार में आ रहा है। तुवर और चना पर 30 सितम्बर तक के लिए भंडारण सीमा लागू है।