केरल में शुष्क एवं गर्म मौसम से बागानी फसलों को खतरा

28-Apr-2026 04:29 PM

कोच्चि। 'मसाला प्रदेश' के नाम से प्रसिद्ध देश के सुदूर दक्षिणी राज्य- केरल में बारिश का अभाव होने तथा तापमान काफी ऊंचा रहने से बागानी फसलों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसमें चाय, कॉफी, नारियल, प्राकृतिक रबड़, सुपारी एवं मसाले आदि शामिल हैं। छोटी (हरी) इलायची की फसल को फिलहाल अच्छी बारिश की सख्त आवश्यकता है। 

केरलम प्लांटर्स एसोसिएशन के अनुसार मानसून पूर्व की वर्षा बहुत कम होने तथा लम्बे समय से मौसम शुष्क एवं गर्म रहने से राज्य के विभिन्न भागों में प्रमुख बागानी फसलों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अगर जल्दी ही मौसम ठंडा नहीं हुआ और अच्छी वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। 

एसोसिएशन के मुताबिक मौजूदा मौसम इन बागानी फसलों के लिए अनुकूल नहीं है। अत्यन्त ऊंचे तापमान एवं भयंकर गर्मी के कारण मिटटी सूखने लगी है। उसमें नमी का अभाव होने से फसलों की प्रगति बाधित हो रही है।

कई क्षेत्रों में इसका असर साफ-साफ दिखाई पड़ने लगा है। छोटे एवं सीमांत उत्पादकों को अपने बागानों का अस्तित्व बचाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। यह मौसम अगर जारी रहा तो उत्पादकों को भारी नुकसान हो सकता है। उत्पादकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। 

फील्ड स्तर के आंकलन के आधार पर एसोसिएशन ने इस प्रतिकूल मौसम से चाय की फसल को 15 से 25 प्रतिशत, प्राकृतिक रबड़ को 20 से 35 प्रतिशत, कॉफी को 20 से 40 प्रतिशत एवं छोटी इलायची की फसल को 30 से 50 प्रतिशत तक नुकसान होने एक अनुमान लगाया है। इस वर्ष राज्य में मार्च से ही बारिश का अभाव रहा है।