भारत में खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के प्रयास से मलेशिया को खतरा नहीं
11-Aug-2025 04:59 PM
मुम्बई। मलेशियन पाम ऑयल कौंसिल (एम्पोक) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने कहा है कि भारत द्वारा खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उससे मलेशिया को निकट भविष्य में कोई खतरा नहीं है।
मलेशिया लम्बे समय तक भारत को पाम तेल की आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश बना रहेगा। उल्लेखनीय है कि नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयल पाम (एनएमईओ- ओ पी) के माध्यम से भारत ने खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त का महत्वाकांक्षी प्रयास आरंभ किया है लेकिन मलेशिया इसे अपने लिए कोई गंभीर चुनौती या खतरा नहीं मानता है। इसके विपरीत एम्पोक ने भारत के इस प्रयास का स्वागत किया है।
एम्पोक के अनुसार भारतीय खाद्य तेल सुरक्षा की दृष्टि से सरकार का यह अग्रगामी कदम है और इसमें मलेशिया का भी सहयोग प्राप्त ही रहा है। इंडोनेशिया के बाद मलेशिया दुनिया में पाम तेल का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है।
यह सही है कि भारत में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने का भरसक प्रयास किया जा रहा है मगर इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। ऑयल पाम के बागानी क्षेत्र का विस्तार नियत लक्ष्य से काफी पीछे है।
इसके परिणामस्वरूप देश में इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे देशों से विशाल मात्रा में पाम तेल का आयात हो रहा है। वर्ष 2024 के दौरान भारत में मलेशिया से पाम तेल का आयात 30 लाख टन पर पहुंचा। घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की कुल खपत में पाम तेल की भागीदारी 34.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है और मलेशिया इसकी आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
एम्पोक का कहना है कि ऑयल पाम के पौधे को पेड़ लगने तथा फल देने के लिए तैयार होने में लम्बा समय लगता है। भारत में पाम बागानों के विस्तार की गति धीमी है जबकि पाम तेल की मांग एवं खपत बहुत ज्यादा है। इसके फलस्वरूप अगले कई वर्षों तक भारत को पाम तेल के लिए विदेशों से आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा।
