भारत में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर अनिश्चितता बरकरार

08-May-2025 03:29 PM

मुम्बई। हालांकि एक अग्रणी व्यापारिक संगठन- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) ने सरकार से पीली मटर के आयात पर कम से कम 50 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाने का जोरदर आग्रह किया है लेकिन सरकार जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के मूड में नहीं है। भारत में दलहनों के संवर्ग में पीली मटर का ही सर्वाधिक आयात हुआ है।

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार विशाल आयात के कारण घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ गई है जिससे अन्य दलहनों की मांग, खपत एवं कीमत प्रभावित हो रही है। सीमा शुल्क के जरिए इसके भारी भरकम आयात को नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता है। 

एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि पीली मटर पर इस स्तर का सीमा शुल्क लगना चाहिए जिससे उसका आयात मूल्य केन्द्र सरकार द्वारा देसी चना के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के समकक्ष हो जाएगा।

ज्ञात हो कि चना का समर्थन मूल्य इस बार 5650 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ है। ध्यान देने की बात है कि दिसम्बर 2023 में शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने से पूर्व पीली मटर पर 50 प्रतिशत का मौलिक सीमा शुल्क लागू था।

पिछले डेढ़ साल के दौरान पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि में अनेक बार वृद्धि की गई। अंतिम बार मार्च में इसकी समय सीमा को 31 मई 2025 तक बढ़ाया गया।

चेयरमैन के अनुसार अब शुल्क मुक्त आयात की अवधि आगे नहीं बढ़नी चाहिए और पीली मटर के आयात को सीमा शुल्क के दायरे में लाया जाना चाहिए। इस पर कम से कम 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू होना चाहिए। 

लेकिन सरकार की समस्या यह है कि उसे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपेक्षित मात्रा में अब तक चना खरीदने में सफलता नहीं मिल पाई है

इसलिए वह इसके विकल्प के तौर पर पीली मटर का आयात जारी रखने के पक्ष में है। मटर के लिए एमएसपी का निर्धारण नहीं होता है और न ही सरकारी तौर पर इसकी खरीद की जाती है। 

भारत में विदेशों से दलहनों के आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। 2023-24 की तुलना में 2024-25 के दौरान दलहनों का आयात करीब 40 प्रतिशत उछलकर 65 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

सरकार को तुवर, उड़द, चना, मसूर एवं पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है और चना मसूर पर 10-10 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है मगर पीली मटर पर अभी तक अनिश्चितता बरकरार है।