भारत और पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी का भीषण प्रकोप
23-Apr-2025 03:09 PM
बंगलोर। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और पाकिस्तान में अब अप्रैल से ही भीषण गर्मी एवं हीटवेव का प्रकोप शुरू हो जाता है जो शुभ संकेत नहीं है। पहले मई-जून में इस तरह का मौसम रहता था।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के लिए कुछ मौसमी कारकों के साथ-साथ मानव निर्मित कारक भी जिम्मेदार है। अल नीनो मौसम चक्र तथा प्रकृति की चंचलता भी इसका कारण माना जा सकता है।
हैरानी की बात है कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम की हालत अक्सर चरम पर पहुंचती रही है मगर फिर भी इस पर अंकुश लगाने का समुचित या गंभीर प्रयास नहीं किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में कृषि उत्पादन और खासकर विभिन्न फसलों की औसत उपज दर बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
मध्य अप्रैल में भारत और पाकिस्तान के विभिन्न भागों में हीटवेव का भयंकर प्रकोप देखा गया और इसका सिलसिला अभी जारी है। इसका प्रतिकूल असर सिर्फ मानवीय स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि विभिन्न सेवा क्षेत्रों, शिक्षा तथा खाद्यान्न उत्पादन पर भी पड़ने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि 'एक्सट्रीम' मौसम को नियंत्रित करने हेतु तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में खतरा बढ़ सकता है।
भारत सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और इसलिए वहां खाद्य जरूरतें भी विशाल है। चावल तथा गेहूं के साथ-साथ अन्य अनाजों, दलहन, तिलहन, कपास और गन्ना आदि के उत्पादन में संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
क्षेत्रफल लगभग स्थिर है इसलिए ऊंची उपज दर के सहारे ही भविष्य में देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है लेकिन यदि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से उत्पादकता में गिरावट आती है तो खाद्य सुरक्षा के लिए संकट बढ़ सकता है।
अल नीनो अथवा ला नीना मौसम चक्र का प्रभाव साल-दो साल से ज्यादा नहीं रहता है लेकिन मनुष्य द्वारा निर्मित कारकों का असर स्थायी होता है।
जलवायु परिवर्तन की वजह से देश में कहीं भयंकर सूखा पड़ता है तो कहीं- विनाशकारी बाढ़ का प्रकोप रहता है। भारत की स्थिति अभी तक लगभग सामान्य है लेकिन पाकिस्तान लम्बे समय तक इसके प्रकोप को झेलने की हालत में नहीं है।
उसकी लड़खड़ाती अर्थ व्यवस्था पर इसका गंभीर प्रतिकूल असर पड़ सकता है जिसे झेल पाना उसके लिए बहुत मुश्किल होगा।
