बेहतर घरेलू उत्पादन की संभावना से मसूर का सीमित आयात होने का अनुमान
31-Jan-2026 01:31 PM
नई दिल्ली। रबी सीजन की दूसरे नम्बर की दलहन फसल- मसूर के बिजाई क्षेत्र में कुछ वृद्धि हुई है और मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल होने से इसकी उपज दर में सुधार आने के आसार हैं। इससे कुल उत्पादन बेहतर होने का अनुमान है। इसी तरह चना के बिजाई क्षेत्र में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में मौजूदा रबी सीजन के दौरान चना का उत्पादन क्षेत्र 91.22 लाख हेक्टेयर से 4.66 लाख हेक्टेयर उछलकर 95.88 लाख हेक्टेयर और मसूर का बिजाई क्षेत्र 17.66 लाख हेक्टेयर से 46 हजार हेक्टेयर बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
चना का बिजाई क्षेत्र 236.80 लाख एकड़ पर पहुंचने तथा औसत उपज दर समान्य रहने पर इसका कुल उत्पादन बढ़कर 114 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा है
जो पिछले सीजन के उत्पादन 111.10 लाख टन से करीब 3 लाख टन ज्यादा है। मसूर की पैदावार भी 16.50 लाख टन से उछलकर 19.90 लाख टन पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार यदि पैदावार का यह अनुमानित आंकड़ा सच में सामने आया तो न केवल मसूर बल्कि चना (देसी) एवं मटर के आयात में भी कमी आ सकती है।
भारत में 1 नवम्बर 2025 से पीली मटर पर 30 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है जबकि मसूर एवं देसी चना के आयात पर 10-10 प्रतिशत का सीमा शुल्क पहले से ही लगा हुआ है।
यदि सीमा शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ अथवा कुछ बढ़ोत्तरी की गई तो वर्ष 2026 में दलहनों का आयात घट सकता है। पीली मटर का आयात पहले से ही कमजोर चल रहा है और मसूर तथा चना के आयात की गति भी धीमी देखी जा रही है।
कनाडा की सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन ने भारत में 2025-26 के मौजूदा रबी सीजन में 19.90 लाख टन मसूर के उत्पादन का अनुमान लगाया है जो 2024-25 सीजन के उत्पादन 16.50 लाख टन तथा पंचवर्षीय औसत उत्पादन 15.50 लाख टन से काफी अधिक है।
एजेंसी के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान भारत में करीब 10.80 लाख टन मसूर का आयात हुआ जो 2026 में कुछ घटकर 10 लाख टन के आसपास सिमट सकता है।
जनवरी से नवम्बर 2025 के दौरान भारत में 9,35,400 टन मसूर का आयात हुआ जो वर्ष 2024 की समान अवधि के आयात 9,19,600 टन से कुछ अधिक रहा। आयात की प्रक्रिया दिसम्बर में भी जारी रही।
