बेहतर उत्पादन एवं ऊंचे आयात से तुवर की कीमतों पर दबाव जारी रहने की संभावना

15-Feb-2025 12:26 PM

मुम्बई। हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के सीजन में लगभग 35 लाख टन अरहर (तुवर) के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र इसे काफी संकीर्ण आंकड़ा मान रहा है।

यह सही है कि कर्नाटक और महाराष्ट्र  जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में पिछले साल प्रगति के चरण में मौसम खराब होने से तुवर की फसल को कुछ नुकसान हुआ था लेकिन बची हुई फसल की हालत बहुत अच्छी रही और इसलिए उपज दर तथा क्वालिटी में काफी सुधार आ गया। 2023 की तुलना में 2024 के खरीफ सीजन में तुवर के बिजाई क्षेत्र में भी बढ़ोत्तरी हुई। 

उद्योग व्यापार क्षेत्र ने 2024-25 सीजन के दौरान तुवर का घरेलू उत्पादन बढ़कर 40 लाख टन के आसपास पहुंचने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के अत्यन्त कमजोर उत्पादन 29 लाख टन से काफी अधिक है। इससे पूर्व 2022-23 में 33 लाख टन एवं 2021-22 में 36 लाख टन तुवर का उत्पादन आंका गया था।

इस बार तुवर का आयात भी बढ़कर 10 लाख टन पर पहुँच जाने की संभावना है। इसके अलावा 1 लाख टन का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था।

इस तरह तुवर की कुल उपलब्धता 51 लाख टन हो जाने की उम्मीद है। इसमें से 42 लाख टन की खपत हो सकती है और सीजन के अंत में 9 लाख टन का अधिशेष स्टॉक बच सकता है। 

यदि उपरोक्त आंकड़ा सही साबित होता है तो मांग एवं खपत की तुलना में तुवर की कुल आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी अधिक रहेगी और इसलिए कीमतों पर दबाव बरकरार रह सकता है।

अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार 7550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है और कई महत्वपूर्ण थोक मंडियों में इसका भाव घटकर इसके आसपास आ गया है।

इससे किसानों को चिंता एवं निराशा हो रही है। वैसे सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर किसानों से तुवर की विशाल खरीद करने के लिए तैयार है जबकि मिलर्स प्रोसेसर्स एवं स्टॉकिस्ट भी इसकी खरीद कर रहे हैं। 

2024-25 के मार्केटिंग सीजन में म्यांमार से 3 लाख टन तथा अफ्रीकी देशों से 7 लाख टन तुवर का आयात होने का अनुमान लगाया गया है लेकिन यदि घरेलू बाजार भाव के अनुरूप निर्यातक देशों में ऑफर मूल्य नहीं रहा तो आयात में कठिनाई हो सकती है।

इसके अलावा अगर किसानों को लाभप्रद मूल्य प्राप्त नहीं हुआ तो अगले खरीफ सीजन में तुवर की खेती के प्रति उसका उत्साह घट सकता है।