बिजाई क्षेत्र में कमी के बावजूद कपास के बेहतर उत्पादन की उम्मीद
17-Oct-2025 01:09 PM
मुम्बई। हालांकि पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान कपास के बिजाई क्षेत्र में करीब 3 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और कुछ इलाकों में अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ से फसल को नुकसान भी हुआ है मगर बाकी बची फसल की हालत काफी अच्छी है और उसकी उपज-दर ऊंची रहने की संभावना है।
इसके आधार पर 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान देश में कपास का उत्पादन सुधरकर 312 से 335 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के बीच पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में कपास के नए माल की आवक तेजी से बढ़ने लगी है जबकि आगामी दिनों में आपूर्ति नियमित रूप से बढ़ते जाने की संभावना है। दूसरी ओर इसका बाजार भाव नरम पड़ता जा रहा है।
ऱाष्ट्रीय स्तर पर कपास की औसत दैनिक आवक बढ़कर 1 लाख गांठ से ऊपर पहुंच गई है लेकिन कमजोर मांग के कारण इसका दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है विदेशों से विशाल मात्रा में आयात होने से 2025-26 सीजन के दौरान रूई का पिछला बकाया स्टॉक बढ़कर 60.59 लाख गांठ पर पहुंच जाने का अनुमान है जो 2024-25 सीजन के बकाया स्टॉक 39.19 लाख गांठ से 21.40 लाख गांठ अधिक है।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष का कहना है कि कपास की मौजूदा फसल की हालत काफी अच्छी है और अक्टूबर के अंत में इसके उत्पादन का आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा।
बीटी कॉटन के सभी 10 उत्पादक राज्यों में अच्छी वर्षा होने तथा खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहने से कपास के पौधों का बेहतर ढंग से विकास हुआ है।
इसे देखते हुए कपास का उत्पादन नीचे में 312 लाख गांठ से लेकर ऊपर में 335 लाख गांठ के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में उपज दर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर कपास का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 113 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 110 लाख हेक्टेयर रह गया। मंडियों में नए माल की आवक दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
पिछले चार दिनों से रोजाना एक लाख गांठ से अधिक माल आ रहा है। 16 अक्टूबर 2025 को मंडियों में 1.17 लाख गांठ कपास की आवक दर्ज की गई।
