ब्रोकन राइस के शिपमेंट की अनुमति मिलने से चावल का निर्यात बढ़ने के आसार

21-Mar-2025 07:38 PM

हैदराबाद। आगामी महीनों के दौरान भारत से चावल के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है क्योंकि लम्बे इंतजार के बाद सरकार ने अंततः 100 प्रतिशत टूटे चावल / ब्रोकन राइस के निर्यात द्वार खोल दिया है। सितम्बर 2024 में इसके निर्यात प्रतिबंध लगाया गया था जिसे 7 मार्च 2025 को हटा लिया गया।

इससे पूर्व गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात को प्रतिबंध  से मुक्त किया गया था और सेला चावल पर लगे निरयत शुल्क को हटाया गया था।

सफेद चावल तथा बासमती चावल के लिए लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को भी समाप्त किया जा चुका है। संक्षेप में कहा जाए तो भारत से अब सभी किस्मों एवं श्रेणियों का चावल तमाम प्रतिबंधों नियंत्रणों एवं शुल्कों से मुक्त हो चुका है। 

ध्यान देने की बात है कि भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है और वैश्विक निर्यात बाजार में 40-42 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।

हालांकि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से चावल का निर्यात ऑफर मूल्य काफी घट गया है लेकिन भारतीय चावल का नियमित रूप से अच्छा शिपमेंट हो रहा है।

एशिया तथा अफ्रीका के अनेक देश इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वैसे माना जा रहा है कि 100 प्रतिशत टूटे चावल का खोया हुआ निर्यात बाजार दोबारा हासिल करने में भारतीय निर्यातकों को काफी संघर्ष करना पड़ेगा क्योंकि दो मोर्चे पर इसकी चुनौती रहेगी। 

पहली बात तो यह है कि वियतनाम, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे निर्यातक देश भारत की तुलना में नीचे दाम पर अपने चावल के शिपमेंट का ऑफर देर रहे हैं जिससे वैश्विक निर्यात बाजार पर भारत की पकड़ कुछ कमजोर पड़ सकती है।

दूसरा मोर्चा घरेलू प्रभाग का है जहां निर्यातकों को एथनॉल निर्यातकों और पोल्ट्री फीड उद्योग की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

इन उद्योगों में टूटे चावल की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है जिससे इसका भाव ऊंचा और तेज रहने की संभावना है।

ऊंचे घरेलू बाजार भाव के कारण निर्यातकों को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की प्रतिस्पर्धा का सामना करने में कठिनाई होगी। 

लेकिन इसके बावजूद भारत ने केवल चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना रहेगा बल्कि निर्यात मात्रा में बढ़ोत्तरी करने में भी सफल हो जाएगा। देश में चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।