ब्रिटेन के साथ एफटीए से भारतीय कृषि क्षेत्र को होगा सीमित फायदा

28-Jul-2025 05:09 PM

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन (इंग्लैंड) के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (एफटीए) यूं तो दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित होगा लेकिन जानकारों का कहना है कि भारतीय कृषि क्षेत्र को इससे सीमित लाभ ही प्राप्त हो सकेगा क्योंकि ब्रिटेन अनेक कृषि उत्पादों का अग्रणी आयातक देश नहीं है।

इंग्लैंड दरअसल कच्चे कृषि उत्पाद के प्रसंस्कृत माल के आयात को प्राथमिकता देता है। भारत से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात अपेक्षाकृत कम होता है।

दूसरी ओर भारतीय कृषि क्षेत्र को इस समझौते के तहत ब्रिटेन से कोई विशेष खतरा नहीं है क्योंकि वहां कृषि उत्पादों का उत्पादन इतना अधिक नहीं होता है कि किसी अन्य देश को भारी मात्रा में उसका निर्यात किया जा सके। वैसे भी डेयरी उत्पादों, सेब तथा खाद्य तेलों को इस समझौते के बाहर रखा गया है। 

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में प्रतिवर्ष लगभग 3.90 अरब डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पादों का आयात किया  जाता है। इसी तरह वह प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के आयात के मामले में दुनिया के 10 शीर्ष देशों में शामिल है। यदि भारत उसके गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता तो इसे भारी फायदा मिल सकता था। 

एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रिटेन में 10 सबसे अधिक आयात होने वाले कृषि एवं प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों में अनाज से निर्मित उत्पाद, अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ, ताजे फल, विविध प्रसंस्कृत उत्पाद, ताजी सब्जियां डेयरी प्रोडक्ट्स, कोकोआ प्रोडक्ट्स, प्रोसेस्ड मीट, मसाले तथा प्रसंस्कृत सब्जियां शामिल हैं।

वर्ष 2023 में वहां इन उत्पादों के आयात का कुल खर्च 46.34 अरब डॉलर दर्ज किया गया। समुद्री उत्पादों का आयात 11 वें नंबर पर रहा। ब्रिटेन में तरल दूध एवं पनीर, जौ, गेहूं, चिकन मीट, मक्का, चीनी, सोया मील, रेपसीड मील, रेपसीड तेल आदि का आयात अच्छी मात्रा में होता है।