बासमती चावल निर्यातकों द्वारा सरकार से शिपिंग चार्ज पर एक्शन का आग्रह

27-Apr-2026 08:16 PM

नई दिल्ली। बासमती राइस फार्मर्स एंड एक्सपोटर्स डवलपमेंट फोरम ने केन्द्र सरकार से शिपिंग चार्ज के मामले में तत्काल कदम उठाने का आग्रह करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच शिपिंग कंपनियां मनमाने ढंग  से चार्ज लगा रही हैं जिससे अनेक व्यापारियों के लिए बासमती चावल का निर्यात करना आर्थिक दृष्टि से गैर-लाभप्रद हो गया है।

फोरम के अनुसार युद्ध- जोखिम सरचार्ज 800 डॉलर से बढ़ाकर 6000 डॉलर प्रति कंटेनर कर दिया गया है और अक्सर कोई पूर्व सूचना दिए बगैर इसे लगा दिया जाता है। जब कार्गो (जहाज) रवाना हो जाता है तब उसकी सूचना दी जाती है। कुछ मामलों में तो यह चार्ज बढ़कर कार्गो पर मौजूद माल के कुल मूल्य के 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की आवश्यकता है।

फोरम के अनुसार निर्यातकों से कहा जाता है कि उन्हें इन परिस्तिथियों के लिए सम्पूर्ण रूप से वित्तीय दायित्व का भार उठाना पड़ेगा जबकि वह भार निर्यातकों के नियंत्रण से बाहर होता है। फोरम द्वारा जारी एक बयान के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के कारण शिपिंग कम्पनियां अपनी इच्छा से जहाजों को जेबेल अली, ट्रांस शिपमेंट केन्द्रों पर जहाजों को रोककर रखती हैं।

इससे आगे की यात्रा कब शुरू होगी- इसके बारे में कोई स्पष्टता नहीं होती है और कुछ मामलों में तो जहाजों को मूल बंदरगाह पर वापस बुला लिया जाता है। इन सब पर होने वाले खर्च का पूरा भार निर्यातकों को उठाना पड़ता है जबकि इसके बारे में उसे पहले से कोई जानकारी नहीं होती है। 

फोरम का कहना है कि जहाजरानी मंत्रालय को कार्गो के लिए शिपिंग चार्ज को सख्ती से केवल प्रदत्त सेवाओं तक सीमित रखने का निर्देश देना चाहिए। शिपिंग कंपनियों को विवादित शुल्क वापसी का प्रयास करने से रोकना चाहिए और इसकी मांग किए बगैर कार्गो को रिलीज करने के लिए कहा जाना चाहिए ताकि निर्यातकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े।