खाद्य तेलों के आयात पर अनेक कारकों का असर पड़ेगा

27-Apr-2026 08:12 PM

कीव। एक अग्रणी संस्था- इंडियन वेजिटेबल ऑयल- प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) की वाइस प्रेसिडेंट- भावना शाह ने कहा है कि भारतीय खाद्य तेल क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है जहां जलवायु का झटका, भू राजनैतिक तनाव एवं ऊर्जा बाजार के संकट जैसे कई कारक इसे काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं।

खाद्य तेल के आयातक कीमतों के बजाए यह देखने का प्रयास करेंगे कि किस देश से इसकी आपूर्ति सुगमता पूर्वक हो सकती है। यूक्रेन की राजधानी- कीव में आयोजित एक कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तीन कारक- कमजोर मानसून, क्रूड (खनिज) तेल का ऊंचा भाव तथा विश्व स्तर पर जैव ईंधन का बढ़ता उपयोग- खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता को जटिल बना सकता है। 

वाइस प्रेसिडेंट के मुताबिक भारत की स्थिति काफी हद तक स्थिर रहने की उम्मीद है क्योंकि स्वदेशी उद्योग से खाद्य तेलों की अच्छी आपूर्ति हो जाती है। रिफाइनर्स काफी होशियारी से इसका आयात करते हैं और जरूरत के अनुसार सरकार भी नीतिगत हस्तक्षेप के लिए तैयार रहती है। 

लेकिन साथ ही साथ उन्होंने आगाह किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के कारण खाद्य तेलों के दाम में कुछ बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत खाद्य तेलों के अधिशेष स्टॉक को ग्रहण करने में सक्षम है।

खाद्य तेल क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को क्रूड, फीड एवं फ्यूल के चश्मे (नजरिए) से देखा जाना चाहिए। खाद्य तेल का आयात 150-170 लाख टन के बीच हो सकता है। गत वर्ष की तुलना में मार्च 2026 के दौरान खाद्य तेल का आयात 11 प्रतिशत बढ़ गया।