बुंदेलखंड संभाग में भारी वर्षा एवं जल जमाव से खरीफ फसलों को नुकसान के संकेत

21-Jul-2025 01:51 PM

झांसी। आमतौर पर सूखाग्रस्त माना जाने वाला बुंदेलखंड संभाग इस बार मूसलाधार वर्षा एवं खेतों में जल भराव का संकट झेल रहा है। वहां ललितपुर, झांसी, बांदा एवं महोबा जैसे जिलों में इस बार जोरदार बारिश हुई है और हो रही है जिससे खरीफ फसल की बिजाई तथा प्रगति में बाधा पड़ रही है। जिन क्षेत्रों में सामान्य वर्षा हुई है वहां बिजाई की स्थिति अच्छी है। 

प्राप्त सूचना के अनुसार ललितपुर जिले में खरीफ फसलों की बिजाई के तुरंत बाद भारी वर्षा होने से कई क्षेत्रों में दलहन के बीज को भारी नुकसान होने के संकेत मिल रहे हैं। वहां खरीफ सीजन में मूंग एवं उड़द की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

ललितपुर जिले में उड़द का सामान्य औसत क्षेत्रफल 2.34 लाख हेक्टेयर रहता है जबकि औसत उत्पादन 1.76 लाख टन होता है। वहां मूंग की औसत उपज दर 1300 टन के आसपास आंकी गयी है।

अत्यन्त भारी वर्षा से खेतों में पानी जमा होने के कारण जिले में खरीफ फसलों की बिजाई 60-70 प्रतिशत पर ही अटकी हुई है और इसमें से कुछ इलाकों में फसल (बीज) के नष्ट हो जाने की सूचना मिल रही है। 

बुंदेलखंड के झांसी, बांदा एवं महोबा जिले में भी जोरदार बारिश हुई है। झांसी में दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों की खेती लगभग 65 प्रतिशत क्षेत्र में पूरी हुई है। उड़द एवं मूंग का रकबा 61 प्रतिशत पर पहुंचा है जबकि सोयाबीन का क्षेत्रफल 69 प्रतिशत दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान मानसून सीजन के दौरान वहां 18 जुलाई तक 499.7 मि०मी० की जोरदार बारिश हुई जो सामान्य औसत वर्षा 267.06 मि०मी० से बहुत ज्यादा है।

कई इलाकों में खेत जलमग्न हो गए हैं जिससे दलहन-तिलहन की फसलों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नुकसान का आंकलन करने के लिए सर्वे टीम का गठन किया है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध बुंदेलखंड संभाग में यदि भारी बारिश का दौर जारी रहा तो वहां दलहनों के साथ-साथ मक्का सहित अन्य मोटे अनाज, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास की फसल को भी गंभीर क्षति हो सकती है।