बुंदेलखंड संभाग में जोरदार बारिश से उड़द की फसल को खतरा

29-Jul-2025 01:04 PM

बांदा। आमतौर पर सूखा ग्रस्त या कम वर्षा वाला क्षेत्र माने जाने वाले बुंदेलखंड संभाग में इस बार मानसून की जबरदस्त बारिश होने से उड़द सहित अन्य दलहन फसलों के लिए खतरा बढ़ गया है। वहां निचले इलाके में खेतों में पानी जमा हो गया है जो दलहन फसलों के लिए नुकसानदायक है। 

उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में अवस्थित बुंदेलखंड संभाग में इस बार उड़द का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से कुछ पीछे चल रहा है जबकि भारी बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे फसल खतिग्रस्त हो सकती है। मध्यवर्ती भारत का यह इलाका उड़द का एक प्रमुख उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर 25 जुलाई तक उड़द का कुल उत्पादन क्षेत्र 16.59 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 17.79 लाख हेक्टेयर से 1.20 लाख हेक्टेयर या 6.75 प्रतिशत कम है।

इस बार खरीफ कालीन उड़द का सामान्य औसत क्षेत्रफल 32.64 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक बिजाई अभी तक इसके आधे भाग में ही पूरी हो सकी है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण पिछले कुछ वर्षों से उड़द की फसल को नुकसान हो रहा है और इसके उत्पादन एवं दाने की क्वालिटी पर असर पड़ा है।

बाजार भाव आकर्षक स्तर पर नहीं होने से किसानों को अन्य ऊंची कीमत वाली फसलों की खेती पर ज्यादा ध्यान देने के लिए विवश होना पड़ रहा है। चालू वर्ष के दौरान बुंदेलखंड संभाग के साथ-साथ राजस्थान तथा गुजरात में भी अत्यधिक वर्षा होने से उड़द की फसल प्रभावित होने की आशंका है। 

इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार बुंदेलखंड तथा राजस्थान में उड़द का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है मगर वहां जरूरत से काफी ज्यादा बरसात होने से फसल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उड़द की बिजाई का सीजन अंतिम चरण में पहुंच रहा है जबकि अनेक क्षेत्रों में बिजाई का आदर्श समय समाप्त हो चुका है। 

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान के अनुसार बुंदेलखंड के प्रमुख उड़द उत्पादक इलाकों में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई है और यदि आगे भी वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो फसल को नुकसान हो सकता है।

लेकिन कितना नुकसान होगा इसका अनुमान लगाना फिलहाल जल्दबाजी होगी। राहुल चौहान के मुताबिक खरीफ सीजन के दौरान देश में करीब एक तिहाई उड़द का उत्पादन बुंदेलखंड संभाग में होता है और इसकी मात्रा 5-6 लाख टन के करीब रहती है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ सीजन में लगभग 15 लाख टन उड़द का उत्पादन होता है।